कोरोना वायरस के चलते देशभर में जारी लॉकडाउन की वजह से होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री बेहद बुरे दौर से गुज़र रही है. कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव को देखकर तो लगता है कि अगले साल तक भी हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री अपने पुराने दौर में लौट नहीं पाएगी. हालांकि, सरकार ने मदद का आश्वासन दिया है, लेकिन ये आश्वासन कागज़ों तक सीमित है. 

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इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, इन दिनों उत्तर प्रदेश की रेस्टोरेंट इंडस्ट्री सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है. यूपी में 25 मार्च से 17 मई के बीच रेस्टोरेंट व्यवसाय को हर दिन 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 3 से 4 महीनों तक ऐसा ही चलता रहा तो इस साल के अंत तक यूपी में 40 प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद हो जायेंगे. इस दौरान 10 लाख से अधिक लोग बेरोज़गारी की कग़ार पर पहुंच जायेंगे.   

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हालांकि, कोरोना संकट के बीच सरकार ने सभी तरह के रेस्टोरेंट्स को ऑनलाइन खाना डिलीवर करने की अनुमति दी है, लेकिन लगता नहीं कि अगले 3 महीनों तक रेस्टोरेंट में बैठकर खाना खाने की अनुमति मिल पाएगी. ऐसे में रेस्टोरेंट मालिकों के लिए केवल होम डिलीवरी के दम पर व्यवसाय कर पाना मुश्किल हो जाएगा. 

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इंडिया टुडे से बातचीत में फ़ेडरेशन ऑफ़ होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष, गरिश ओबेरॉय ने कहा कि 'यूपी के सभी रेस्टोरेंट लॉकडाउन के तीन चरणों तक बंद रहे. इस दौरान राज्य में 2 लाख से अधिक फ़ूड जॉइंट्स बंद रहने से हर दिन 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ. यूपी में रेस्टोरेंट उद्योग अकेले 10 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार देता है. कोरोना के प्रतिकूल प्रभाव से इस साल के अंत तक 40 प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद हो सकते हैं'. 

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इंडिया टुडे से बातचीत में यूपी की राजधानी लखनऊ में दो मांसाहारी रेस्टोरेंट के मालिक, उत्तम कश्यप का कहना है कि, वो व्यवसाय फिर से शुरू करने में असमर्थ हैं क्योंकि उनके अधिकांश कर्मचारी लॉकडाउन के चलते अपने गांव लौट चुके हैं. 

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'मेरा अधिकांश स्टाफ़ पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से था. मेरे दोनों रेस्टोरेंट में 25 से अधिक लोगों का स्टाफ़ था, अब केवल 4 से 5 कर्मचारी ही बचे हैं. शेष कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल हो रहा है क्योंकि पिछले दो महीने से 1 रुपये का व्यवसाय नहीं हुआ है. ऐसे में हमें मजबूरन शाकाहारी भोजन बनाकर अपने दैनिक ख़र्चे निकालने होंगे. लॉकडाउन से होने वाला नुकसान काफ़ी ज़्यादा है'. 
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वहीं लखनऊ के मशहूर 'रॉयल कैफ़े' के मैनेजर अरुण आहूजा का कहना है कि, 'लखनऊ में हमारे 3 रेस्टोरेंट हैं, जहां 50 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं. हमारा 50 प्रतिशत से अधिक स्टाफ़ अपने गृह ज़िलों को लौट चुके हैं. ऐसे में कैफ़े खोल पाना मुश्किल हो रहा है. अगर हमारे हज़रतगंज आउटलेट की बात करें तो वहां से हर दिन 1 लाख रुपये से अधिक की कमाई होती थी. 2 महीने से कोई काम नहीं है. ऐसे में अपने कर्मचारियों को मार्च तक का वेतन ही दे पाए'.