11 दिसंबर 1998, दिल्ली का समयपुर बादली इलाक़ा. उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फ़ोर्स और दिल्ली पुलिस एक सेडान कार को अचानक घेर लेती है. कुछ ही देर में गोलियों की तड़तड़ाहट का शोर पूरे इलाके को शांत करा देता है. इस एनकाउंटर में दो अपराधी ख़ून से लथपथ ढेर नज़र आते हैं. पुलिस एलान कर देती है कि अपराधी मारे गए. टीवी पर न्यूज़ आ जाती है.

Gangster Munna Bajrangi
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उन्हें मरा समझकर पुलिस राम मनोहर लोहिया अस्पताल बॉडी ले आती है. तब ही उनमें से एक अपराधी अचानक अपनी आंखें खोल देता है. ये देखकर पुलिस और डॉक्टर दोनों चौंक जाते हैं. 11 गोलियां लगने के बावजूद वो बदमाश सांस ले रहा होता है. वो अपराधी कोई और नहीं, बल्क़ि पूर्वी उत्तर प्रदेश का माफ़िया डॉन मुन्ना बजरंगी (Gangster Munna Bajrangi) उर्फ़ प्रेम प्रकाश था.

250 रुपये का तमंचा लेकर गुनाह की दुनिया में मारी थी एंट्री

साल 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में प्रेम प्रकाश का जन्म हुआ. पढ़ाई उसने सिर्फ़ पांचवी तक की थी. महज़ 14 साल की उम्र में उसकी शादी हो गई. मगर शादी के पांच दिन बाद कुछ ऐसा हुआ, जिसने प्रेम प्रकाश को मुन्ना बजरंगी बना दिया. 

उसके चाचा का गांव के रहने वाले एक शख़्स भूलन सिंह से विवाद हो गया. अपने चाचा को गाली पड़ता देख मुन्ना बजरंगी को ग़ुस्सा आ गया. उसने 250 रुपये तमंचा ख़रीदा और भूलन को ख़त्म कर दिया. ये जानकारी दिल्ली पुलिस ने अपनी इंट्रोगेशन रिपोर्ट में दी थी. हालांकि, उस पर पहली एफ़आईआर 17 साल की उम्र में हुई. उस पर अवैध हथियार रखने और लड़ने का मामला था.

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बजरंगी बाद में अपराध की दुनिया में पहचान बनाने के लिए जौनपुर में गजराज सिंह के गिरोह में शामिल हो गया. मुन्ना बजरंगी ने अपना पहला बड़ा अपराध 1984 में किया था. मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी. उसके मुंह खून लग चुका था. इसके बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या कर दी.

बना मुख़्तार अंसारी का राइट हैंड

मुन्ना का क़द अपराध की दुनिया में दिन-ब-दिन बड़ा होता जा रहा था. ऐसे में बाहुबली माफ़िया और राजनेता मुख़्तार अंसारी की नज़र भी उस पर पड़ी. बजरंगी अब मुख़्तार के गैंग में शामिल हो गया. अंसारी गैंग का प्रभाव पूरे पूर्वांचल पर था. मगर वो ऑपरेट मऊ से करते थे. 

मुख़्तार अंसानी 1996 में समाजवादी पार्टी से मऊ सीट से ही विधायक बन गया. और फिर शुरू हुआ राजनीति और अपराध का भयानक गठजोड़. अंसारी और बजरंगी के गुर्गे अपने बाहुबल के दम पर सरकारी ठेके हड़पने लगे. इस दौरान जमकर पैसा बरस रहा था. 

बीजेपी नेता कृष्णानंद राय की दिल दहला देने वाली हत्या

पूर्वी उत्तर प्रदेश के आपराधिक नक़्शे को उठाकर देखेंगे, तो वहां एक नहीं, बल्कि कई बाहुबली और माफ़िया नज़र आते हैं. ब्रिजेश सिंह एक ऐसा ही माफ़िया था. कहते हैं ब्रिजेश सिंह बीजेपी के तेज़ी से उभरते नेता और विधायक कृष्णानंद राय का क़रीबी था. दोनों मुख़्तार के लिए चुनौती बन गए थे. लेकिन किसी को नहीं पता था कि वर्चस्व की ये जंग भयानक रूप अख़्तियार करने वाली है. 

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29 नवंबर 2005, गाजीपुर मे बीजेपी नेता कृष्णानंद राय मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र के भांवरकोल ब्लॉक के सियाड़ी गांव में आयोजित क्रिकेट प्रतियोगिता का उद्घाटन करने पहुंचे. फिर वहां से वो शाम भांवरकोल क्षेत्र के बसनिया पुलिया के पास थे, तब ही AK-47 राइफ़ल्स से लैस अपराधियों ने उनकी कार पर गोलियों की बौछार कर दी. कहते हैं कुल 400 गोलियां चलीं. कृष्णानंद राय व उनके छह साथी मौक़े पर ही मारे गए. मारे गए सातों लोगों के शरीर से 67 गोलियां बरामद की गईं. कहते हैं ये काम किसी और का नहीं, बल्कि मुन्ना बजरंगी का ही था, जिसने मुख़्तार के कहने पर इसे अंजाम दिया था. 

मुन्ना सालों तक पुलिस से आंख-मिचोली खेलता रहा. उस पर सात लाख रुपये का इनाम रखा गया था. साल 2009 में मुंबई के मलाड इलाके से गिरफ्तार किया गया. बजरंगी ने 2012 में तिहाड़ जेल में कैद रहते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भी लड़ा था. उसने अपना दल और पीस पार्टी के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में मरियाहू से चुनाव लड़ा, मगर हार गया. 

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जेल में ही हुआ मुन्ना बजरंगी का अंत

कहा जाता है कि मुन्ना ने 20 साल में 40 से ज़्यादा हत्याएं की थीं. मगर उसका अंत भी उतना ही खूंखार रहा. 9 जुलाई 2018 में बागपत जेल में उसे 10 गोलियां मारकर हत्या कर दी गई. इस मर्डर का आरोप कुख्यात बदमाश सुनील राठी पर है.