देशभर में नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध जारी है. विरोध प्रदर्शन, विरोध के नये-नये तरीके ढूंढ रहे हैं तो उन पर क़ाबू पाने के लिए पुलिस भी नये हथकंडे अपना रही है.


The Statesman की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश पुलिस ने लखनऊ के घंटा घर के सामने से महिला प्रदर्शकों को हटाने के लिए उनके कंबल और खाने-पीने की चीज़ें छीन लीं.

शाहीन बाग़ की महिलाओं से प्रेरित होकर बीते शुक्रवार को लगभग 50 महिलाओं ने बैठकर विरोध शुरू किया. शनिवार को सैंकड़ों बच्चे और महिलाएं उनका साथ देने के लिए पहुंचे. मौक़े पर पुलिस और रैपिड एक्शन फ़ोर्स भारी मात्रा में मौजूद थे. कुछ प्रदर्शकों ने ही पुलिस द्वारा कंबल और खाने-पीने की चीज़ें ले जाने के वीडियोज़ शेयर किये.

National Herald के रिपोर्ट के अनुसार, होम मेकर आयशा सिद्दक़ी ने बताया,

'हमारे और पुलिस के बीच छोटी-मोटी मुठभेड़ हो गई जब वे हमारे कंबल और रज़ाइयां छीनने आये. वे कुछ कंबल छीनने में क़ामयाब हो गये पर हम अभी भी यहीं हैं. अगर पुलिस चाहती है तो वो सारे ऊनी कपड़े छीन सकती है पर हमारा विरोध जारी रहेगा.'

विरोध कर रही महिलाओं का कहना है कि पुलिस ने पुरुषों को आग जलाने से भी मना कर दिया है. स्थानीय निवासियों ने कार्पेट और रज़ाईयों की व्यवस्था करने की कोशिश की पर उन्हें भी मना कर दिया गया. इसके बाद महिलाएं अपने-अपने घरों से कंबल और रज़ाइयां ले आईं.

'हम अंबेडकर गांधी वाले हैं, न मानेंगे न हारेंगे', 'सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा' जैसे पोस्टर्स के साथ विरोध जारी रहा.


ये प्रोटेस्ट काफ़ी अलग है क्योंकि यहां न पुरुषों को सम्मलित होने दिया जा रहा है और न ही नेताओं को.