वडोदरा की ये घटना आपका इंसानियत पर विश्वास और गहरा कर देगी.

जनवरी 2018 में मां की हत्या हो जाने के बाद 8 साल के भावेश का सहारा उसके पिता, भारत देवीपूजक ही थे. बेचारा भावेश इस बात से अनजान था कि उसका मां का हत्यारा और कोई नहीं पर खुद उसके पिता है. सोमवार को जब पुलिस ने ये मर्डर मिस्ट्री सुलझा कर भारत को गिरफ़्तार किया तो नन्हा भावेश बिलकुल अकेला हो गया था.

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पर वो कहते हैं ना, जिसका कोई नहीं होता उसका ख़ुदा होता है. कुछ ऐसा ही भावेश के साथ हुआ. माता-पिता दोनों छिन जाने के बावजूद भावेश अकेला नहीं था क्योंकि पुलिस वालों ने उसे अपनी देख-रेख में रखने का फ़ैसला लिया. वो चाहते थे कि जब तक भावेश बड़ा न हो जाए वो लोग उसकी देखभाल करें.

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भावेश अभी तक अपने पिता के साथ एक कमरे वाले घर में रहता था. उसके पिता एक दुकान पर मामूली मज़दूर थे.

TOI की ख़बर के अनुसार, भावेश की मां कंकु अपने पति भारत से उनका घर बेचने पर नाराज़ थी. ये घर भारत को सरकार की Low Cost हाउसिंग स्कीम के अंतर्गत मिला था. कंकु और भारत के बीच बहुत बहस हुई इसी बीच भारत ने उसका गला घोंट दिया और रात को उसी कमरे में सो गया. अगले दिन भारत ने पुलिस में अपनी पत्नी को पलंग पर मरा पाने की शिकायत दर्ज़ करवाई.

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Times of India की ख़बर के अनुसार, भावेश का नया घर अब पानीगेट में ज़ोन 3 के ऑफ़िस बिल्डिंग का एक कमरा है. सुबह एक महिला पुलिस अधिकारी आकर उसको जगाती है और उसका नाश्ता तैयार करती है.

पुलिसकर्मी भावेश के लिए कभी फल तो कभी चॉकलेट लाते रहते हैं. कुछ तो उसके साथ खेलते भी हैं.

Times of India से बातचीत के दौरान एक पुलिस अधिकारी बताता है, 'हमें आशा है की एक बार जब वो फिर से स्कूल जाने लगेगा और अपने दोस्तों से मिलेगा तो उसकी ज़िंदगी पहले कि तरह हो जाएगी. वो बहुत चंचल है और पढ़ाई में भी अच्छा है.'

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असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (E डिवीज़न), एस जी पाटिल कहते हैं,

अगर भावेश को यहां अच्छा नहीं लगा तो हम उसे बच्चों के हॉस्टल में भेज देंगे लेकिन हम हमेशा उसके अभिवावक रहेंगे.

भावेश की शिक्षा का ख़र्चा सभी पुलिस अधिकारी मिलकर उठाते हैं.