इस दुनिया में शायद हर मर्ज़ का इलाज किया जा सकता है सिवाए जाहिलियत के. ख़ासतौर से जब गंवारपना शिक्षा की कमी के चलते नहीं, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी की ढिठई से आया हो. हिमाचल प्रदेश के लोगों द्वारा शेयर की गईं गंदगी की तस्वीरें हमारी इसी बेशर्मी को बयां कर रही हैं. 

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दरअसल, कोरोना लॉकडाउन के चलते हर शख़्स अपने घरों में बंद हो गया तो प्रकृति और प्राकृतिक स्थलों को दो पल सांस लेने का मौका मिला. लेकिन एक बार फिर लोगों ने बाहर निकलना शुरू कर दिया है और इसी के साथ कचरे के रूप में अपनी पहचान छोड़ने का दौर भी शुरू हो गया. 

परेशानी किसी के घूमने से नहीं है, बशर्ते सोशल डिस्टेंसिंग और थोड़ी सभ्यता का ख़्याल रखा जाए तो. लेकिन यही तो समस्या है. हम ख़ूबसूरत जगह देखना चाहते हैं लेकिन उन्हें वैसा ही बरकरार नहीं रहने देना चाहते. नतीजा, हमारे इसी देसी अल्हड़पन की क़ीमत टूरिस्ट स्पॉट और वहां के स्थानीय लोगों को चुकानी पड़ती है. 

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मसलन, हिमाचल प्रदेश के लोगों द्वारा शेयर की गई ये तस्वीरें, जो बाहर से आए टूरिस्ट द्वारा फैलाए गए कचरे को दिखा रही हैं. इन तस्वीरों को देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कैसे लोग इन टूरिस्ट स्पॉट्स को डंपिंग ग्राउंड की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. 

स्थानीय लोगों को अब डर सता रहा है कि ये टूरिस्ट उनके ख़ूबसूरत राज्य और शहर को डंपिंग ग्राउंड में तब्दील कर देंगे. कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे गैर-ज़िम्मेदार लोगों पर भारी जुर्माना लगाना चाहिए तो कुछ ने थाईलैंड मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया, जहां नेशनल पार्क घूमने आए लोगों से हर प्लास्टिक की बोतल के बदले 50 रुपये वसूल किए जाते हैं, जब टूरिस्ट घूमकर वापस आते हैं तो सभी बोतलें साथ होने पर ये पैसा उन्हें रिफ़ंड कर दिया जाता है. 

हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि चाहें जितनी भी जागरुकता क्यों न फैलाई जाए लेकिन कुछ इडियट्स ऐसे हैं, जिन्हें कभी अक्ल नहीं आने वाली है. 

सच में ऐसे लोगों से न सिर्फ़ भारी जुर्माना वसूल करना चाहिए, बल्कि पकड़े जाने पर सारी गंदगी भी इनसे ही साफ़ करवानी चाहिए.