हाल ही में भारतीय मूल के पराग अग्रवाल (Parag Agrawa) माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के नये सीईओ बने हैं. इस बीच भारतीय मूल के एक और सीईओ की सोशल मीडिया पर ज़ोरों-शोरों से चर्चा हो रही है. इन जनाब ने जो किया है उसके लिए इन्हें खड़ूस बॉस कहा जा रहा है. भारतीय मूल का ये सीईओ अपनी किसी बड़ी उपलब्धि के लिए नहीं, बल्कि अपनी कंपनी के 900 कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकालने की वजह से सुर्ख़ियों में है. 

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विशाल गर्ग (Vishal Garg)
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दरअसल, भारतीय मूल के इस सीईओ ने कुछ दिन पहले 3 मिनट की जूम कॉल के दौरान अपनी कंपनी के 900 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है. इस वजह से ये जनाब इन दिनों सुर्ख़ियों में हैं. इनका नाम विशाल गर्ग (Vishal Garg) है, जो अमेरिकी कंपनी Better.com के फ़ाउंडर और सीईओ हैं. ये कंपनी होम लोन समेत विभिन्न प्रकार की सेवाएं देती है.

विशाल गर्ग (Vishal Garg)
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कौन हैं विशाल गर्ग? 

भारतीय मूल के विशाल गर्ग पिछले कई सालों से अपने परिवार के साथ अमेरिका में रहते हैं. 43 वर्षीय विशाल अपनी पत्नी और 3 बच्चों के साथ न्यूयॉर्क के ट्रेबेका में रहते हैं. ये न्यूयॉर्क शहर की सबसे महंगी जगहों में से एक है, जहां केवल करोड़पति ही रहते हैं. विशाल ने 'ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी' से MBA की डिग्री हासिल की है. वर्तमान में वो Better.com के फ़ाउंडर और सीईओ हैं. इसके अलावा वो 'One Zero Capital' के फ़ाउंडिग पार्टनर भी हैं, जो एक इन्वेस्टमेंट होल्डिंग कंपनी है. 

Who is Vishal Garg?
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क्यों निकाला 900 कर्मचारियों को? 

विशाल गर्ग ने अपनी 3 मिनट की ज़ूम कॉल के दौरान कहा, मैं आज एक कठिन फ़ैसला लेने जा रहा हूं. यदि आप इस वेबिनार में हैं, तो आप उस दुर्भाग्यपूर्ण ग्रुप का हिस्सा हैं, जिनकी छंटनी होने जा रही है. आपको तत्काल प्रभाव से नौकरी से हटाया जा रहा है. आप लोगों को HR से ई-मेल मिलेगी, जिसमें नौकरी से हटाए जाने के बारे में जानकारी होगी. मैं अपने करियर में ये दूसरी बार करने जा रहा हूं और मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा. जब मैंने पहली बार ऐसा किया था तो मैं अपने फ़ैसले पर ख़ूब रोया था. 

इस दौरान एक कर्मचारी ने इस 'ज़ूम कॉल' को मोबाइल पर रेकॉर्ड कर लिया और फिर उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसके बाद वो वायरल हो गया.

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विशाल गर्ग ने मांगी माफ़ी 

मीडिया सोशल मीडिया से लेकर तक, हर जगह से आलोचना होने के बाद आख़िरकार विशाल गर्ग ने माफ़ी मांग ली है. इस बीच उन्होंने अपनी ग़लती स्वीकार करते हुए कर्मचारियों से मांफ़ी मांगते हुए कहा कि, उनका तरीका ग़लत था और उनसे भारी चूक हुई है. गर्ग ने कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने के पीछे बाज़ार की दक्षता, प्रदर्शन और उत्पादकता को कारण बताया.

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मैं उन लोगों के प्रति पर्याप्त सम्मान और आभार जाहिर करने में विफ़ल रहा हूं, जिन्होंने कंपनी में अपना अमूल्य योगदान दिया. हालांकि, छंटनी के अपने निर्णय पर मैं अब भी कायम हूं, लेकिन इसे जिस तरीके से मैंने लागू किया वो ग़लत था. ऐसा करते हुए मैंने आप सभी को शर्मिंदा किया है. अब मुझे ये एहसास हो गया है कि जिस तरह से मैंने छंटनी की जानकारी दी, उससे हालात और बिगड़े.  
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नौकरी से पहले भी निकाल चुके हैं कर्मचारियों को 

विशाल गर्ग का विवादों से पुराना नाता रहा है. इससे पहले भी वो अपने कई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुके हैं और उस वक्त उन्होंने बेहद ही सख्त भाषा का इस्तेमाल किया था. इस दौरान उन्होंने लिखा था, 'आप बहुत धीरे-धीरे काम करते हैं, आप बेवकूफ़ डॉल्फिनों के झुंड जैसे हो...तो बस करो...बस करो...बस करो...तुम मुझे शर्मिंदा कर रहे हो.

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कोरोना काल में दयालुता के लिए थे चर्चा में 

कोरोना काल में भी विशाल गर्ग ख़ूब चर्चा में थे, लेकिन तब वजह अलग थी. इस दौरान उन्होंने 'न्यूयॉर्क सिटी पब्लिक स्कूल' के विद्यार्थियों की ऑनलाइन लर्निंग को बेहतर करने के लिए 20 लाख डॉलर (15 करोड़ रुपये) का दान दिया था. इन पैसों का इस्तेमाल आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए क्रोमबुक, आईपैड, वाईफ़ाई हॉटस्पॉट, किताबें और ड्रेस ख़रीदने के लिए किया गया था.

विशाल गर्ग अक्सर ख़ुद को सुर्ख़ियों में बनाए रखने के लिए कुछ न कुछ करते ही रहते हैं.