"आज भारत एक गणतंत्र राज्य बन गया" 26 जनवरी, 1950 को दुनियाभर के सभी अख़बारों में यहीं मुख्य ख़बर थी. अंग्रेज़ों से मिली आज़ादी के ढाई साल बाद इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था.

उस दिन गणतंत्र दिवस की परेड पुराने किले के सामने ब्रिटिश स्टेडियम में हुई थी. इस जगह आज दिल्ली का चिड़ियाघर हैं और स्टेडियम की जगह पर नेशनल स्टेडियम मौजूद है.

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देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने जैसे ही गणतंत्र भारत में पहली बार तिरंगा झण्डा लहराया, इसी के साथ परेड की शुरुआत हो गई. सबसे पहले तोपों की सलामी दी गई जिससे पुराना किला गूंज उठा. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी वहां मौजूद थे, उनके साथ सी राजगोपालाचारी भी थे, वे अंतिम ब्रिटिश वायसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन की जगह गवर्नर-जनरल का पद संभाल रहे थे. और साथ में मौजूद थे गणतंत्र भारत के पहले मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो.

भारत की पहली गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि दक्षिण पूर्व एशिया के दिग्गज नेता और इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो थे.

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6 जून, 1901 में इंडोनेशिया के सुरब्या में जन्मे सुकर्णो का असल नाम Kusno Sosrodihardjo था. सुकर्णो की मां हिन्दू धर्म में बहुत विश्वास रखती थीं और उन्होंने सुकर्णों को भी हिन्दू धर्म सिखाया था.

सुकर्णो ने इंजीनियरिंग की थी. सुकर्णो को कई भाषाओं जैसे जावानीज़, सूडानी, बालिनीज, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और आधुनिक इंडोनेशियाई में महारत हासिल है.सुकर्णो का कार्यकाल 18 अगस्त 1945 से 12 मार्च 1967 तक चला था.

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राष्ट्रपति सुकर्णो ने गणतंत्र दिवस पर अपने भाषण का अंत 'जय हिंद' के साथ किया था. वहीं, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपने भाषण का अंत इंडोनेशियाई शब्द 'मर्देका' से किया था, जिसका अर्थ आज़ादी होता है.