फ़्री मेडिकल चेकअप बेंगलुरु के 55 वर्षीय महिला को बहुत मंहगा पड़ा, संक्रमण की वजह से उन्हें अपने दाहिने आंख की रौशनी गंवानी पड़ी.

फ़मीदा बेग़म का आरोप है कि डॉक्टर ने सर्जरी के दौरान सावधानी नहीं बर्ती, उन्होंने शिकायत के लिए पुलिस का दरवाज़ा खटखटाया.

Source: The New Indian Express

Padarayanapura की निवासी फ़मीदा बेग़म को Nayonika Eye Care Charitable Trust की शाखा में काम कर रहे डॉक्टर के ख़िलाफ़ जे. जे. नगर पुलिस स्टेशन में 2 महीने लगे FIR लिखवाने में.

पिछले साल अगस्त महीने में फ़मीदा ने देखा कि उसके घऱ के पास कुछ लोग कतार बना कर खड़े हैं, पास जा कर पता चला कि वहां मुफ़्त में आंखों की जांच चल रही थी, उन्होंने The New Indian Express को बताया, 'मैं अपनी आंख दिखाने गई, मुझे दूर का देखने में समस्या आ रही थी. डॉक्टर ने कहा कि सर्जरी करनी पड़ेगा, जिसकी तारीख अगले सप्ताह तय की गई. 6 औरतों को SUV में बिठा कर TC Palya के Eye Care Centre ले जाया गया.'

एक महिला डॉक्टर ने सर्जरी की और आंख में लेंस लगाने के बाद उसे ढकने के लिए एक ग्लाल दे दी, अगले दिन बैंडेज हटाने के बाद कुछ दवाईयां और टेबलेट भी खाने के लिए दिए गए. एक सप्ताह के बाद फ़मीदा के आखें लाल पड़ने लगीं और आंसू आने लगे. वो दोबारा से Eye Centre गई , वहां उसे बताया गया कि उसकी आंखों को धो दिया गया है, आगे कोई समस्या नहीं होगी लेकिन संक्रमण फैल चुका था.

जनवरी में आ कर Eye Center ने कहा कि वो अब आगे फ़मीदा का इलाज नहीं कर पाएंगे. फ़मीदा की बेटी रज़िया सुल्ताना ने कहा, 'मैं अपनी मां को Minto Eye Hospital लेकर गई. संक्रमण के फैल जाने के बाद लाने के लिए डॉक्टर ने डांट लगाई. बाद में हम नारायण नेत्रालय भी गए, वहां हमे बताया गया कि मां की आखों की रौशनी जा चुकी है और वो उसे वापस लाने की गैरेंटी नहीं दे सकते. इलाज के बाद जब आखें ठीक नहीं हुई तो उन्होंने कहा कि आंख को निकाल कर उसकी जगह प्लास्टिक की आंख लगानी पड़ेगी.'

सुल्ताना ने बताया कि शुरुआत में पुलिस FIR नहीं लिख रही थी, उल्टे उन्हें धमकाया जा रहा था. बाद में जब मानव अधिकार समुह और डिप्टी कमिशनर ऑफ़ पुलिस से बात की, तब IPC सेक्शन 338 के तहत FIR लिखी गई.

उधर Eye Center के डॉक्टर का कहना है कि फ़मीदा की ग़लती की वजह से संक्रमण फैला है, उसने सर्जरी के बाद अपने आखों को मल लिया, जिसकी वजह से ऐसा हुआ.