हर साल की तरह एक बार फिर यूनाइटेड नेशंस ने अपनी 'वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट' (World Happiness Report 202) जारी की है. 146 देशों की लिस्ट में लगातार पांचवी बार फ़िनलैंड को दुनिया का सबसे ख़ुशहाल देश माना गया है और ये अमेरिका, रूस, चीन जैसे विकसित देशों को पछाड़ कर पहले पायदान पर क़ायम है. भारत ने 136वें स्थान पर अपनी जगह बनाई है. अगर हमारे पड़ोसी देशों की बात करें, तो भारत उस लिहाज़ से इस लिस्ट में काफ़ी पीछे है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किन आधारों पर दुनिया के सबसे ख़ुश और सबसे दुखी देशों की हर साल रैंकिंग की जाती है? ऐसी क्या वजहें हैं, जिसने भारत को लिस्ट में इतनी नीची रैंकिंग पर धकेल दिया? 

बेहद कम ही लोग होंगे, जिनके पास इन सवालों के उत्तर होंगे. दरअसल, ये रैंकिंग हैप्पीनेस इंडेक्स (Happiness Index) के आधार पर होती है. इस इंडेक्स के कुछ फै़क्टर्स होते हैं, जिसमें हर फै़क्टर्स का 0 से 10 की स्केल पर मूल्यांकन किया जाता है. चलिए आपको बता देते हैं कि वो फै़क्टर्स कौन-कौन से हैं

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World Happiness Report 2022

1. जीवन में चुनाव करने की आज़ादी

इसको लेकर एक सर्वे किया जाता है, जिसमें हर देश के लोगों से कुछ सवाल पूछे जाते हैं. इन सवालों में जीवन में चुनाव करने की आज़ादी भी एक अहम कारक है. ये देखा जाता है कि आप अपने जीवन के जो भी फ़ैसले लेते हैं, उसमें आपका ख़ुद का कितना रोल है. चाहे वो करियर के मामले में हो, पैसों के लेन-देन के मामले में हो या फिर अपना जीवनसाथी चुनने के मामले में हो. इस कारक को अनेक पहलुओं से आंका जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि लाइफ़ में अपने हिसाब से चुनाव करना भी आपकी ख़ुशी के पीछे की मुख्य वजह मानी जाती है. 

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2. सोशल सपोर्ट

आपके ख़ुशी या दुःख के पलों में आपके देश में एक व्यक्ति को समाज से कितना सपोर्ट मिलता है, ये फै़क्टर भी इस लिस्ट में शामिल है. इसमें सवाल पूछे जाते हैं कि जैसे आपके मुसीबत में होने पर क्या आपके किसी क़रीबी व्यक्ति या दोस्त ने मदद की? फिर आपको इसे 0 से 10 के बीच में रेटिंग देने को कहा जाता है. 0 का मतलब होता है कि आपका समाज पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है, वहीं 10 का मतलब होगा कि आप बाहरी लोगों पर 100 प्रतिशत भरोसा करते हैं. इस तरह के कई प्रश्न एक देश में 1,000 से 3,000 लोगों तक पूछे जाते हैं और उसी के आधार पर उनका एवरेज सैम्पल साइज़ बनता है. ये सर्वे गैलप वर्ल्ड पोल एजेंसी करती है. (World Happiness Report 2022)

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3. स्वस्थ जीवन प्रत्याशा

आपके शरीर में कितनी बीमारियां हैं या फिर आपको उन बीमारियों का अपने देश में कितना सफ़ल इलाज मिलता है, ये भी हैप्पीनेस इंडेक्स के अंतर्गत आता है. अगर आप एक हेल्दी लाइफ़स्टाइल जियेंगे, तो आपके ख़ुश रहने के चांसेज़ उतने ही ज़्यादा हैं. ये कारक कहीं न कहीं आपकी क्वालिटी ऑफ़ लाइफ़ पर भी निर्भर करता है. 

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4. उदारता

ऐसी कई रिसर्च सामने आई हैं कि लोगों को दूसरे व्यक्तियों की मदद करने से भी ख़ुशी मिलती है. इसलिए इस सर्वे में ये भी पूछा जाता है कि क्या आपने हाल-फ़िलहाल में किसी चैरिटी को डोनेट किया है या फिर किसी असहाय की मदद की है? ऐसा माना जाता है कि वो व्यक्ति दान-पुण्य में ज़्यादा विश्वास करते हैं, जो अपने जीवन से ख़ुश हैं. इसके अलावा यहां दान का मतलब किसी मंदिर या धार्मिक जगहों पर दान करना नहीं बल्कि असहाय लोगों की मदद करना है. (World Happiness Report 2022)

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5. प्रति व्यक्ति वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद

इसको मापने के लिए एक विशेष देश के कुल आर्थिक आउटपुट को लोगों की संख्या और उनके महंगाई से एडजस्टमेंट के अनुपात का भाग कर दिया जाता है. ये विभिन्न देशों के बीच की स्टैंडर्ड ऑफ़ लिविंग को कैलकुलेट करने के लिए किया जाता है. लोग किस क्वालिटी की लाइफ़ जी रहे हैं, उसका भी उनकी ख़ुशी में एक अहम योगदान है.

GDP per capita
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6. भ्रष्टाचार की धारणा

ये कारक भी एक विशेष देश के लोगों की खु़शियों में एक बड़ा रोल निभाता है. इसके तहत पूछा जाता है कि आपके देश में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी मज़बूत हैं? व्यापार में किस हद तक भ्रष्टाचार है? देश में जितना भ्रष्टाचार कम होगा, उतने ही ज़्यादा लोग ख़ुश रहेंगे. (World Happiness Report 2022)

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Source: indiatoday

इस सर्वे में तो कई डीटेल्स हैं.