World's First Edible Saree : एक क्रिएटिव दिमाग़ क्या नहीं कर सकता है. विश्व भर में आपको कई ऐसे लोग मिल जाएंगे, जिन्होंने असाधारण काम करके दिखाया. जिनकी क्रिएटिविटी आपको दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर सकती हैं. वैसे भारत देश में भी क्रिएटिव लोगों की कमी नहीं हैं. यहां के शहर भी होनहार लोगों से भरे पड़े हैं. आइये, इसी क्रम में हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी क्रिएटिव महिला के बारे में जिन्होंने विश्व की पहली ‘एडिबल साड़ी’ बनाकर दिखाई है. जी हां, ये कोई मज़ाक नहीं है, इस साड़ी को पहनने के साथ-साथ खाया भी जा सकता है. आइये, जानते हैं कौन हैं वो महिला और क्या है उनकी ‘एडिबल साड़ी’ की पूरी कहानी.  

आइये, अब जानते हैं एना एलिज़ाबेथ जॉर्ज की एडिबल साड़ी के बारे में (World's First Edible Saree). 

एना एलिज़ाबेथ जॉर्ज 

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हम जिस महिला की बात कर रहे हैं उनका नाम है एना एलिज़ाबेथ जॉर्ज. एना एलिज़ाबेथ केरल के कोल्लम शहर की रहने वाली हैं और पेशे से एक सेल बायोलॉजी रिसर्चर हैं. वहीं, हाल ही में उन्होंने B.S.M.S में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया है. इसका अलावा, वो Jacob Bakes (जो डिज़ाइनिंग केक बनाता है) और Jacob Florals (इवेंट्स के लिए फूल क्राफ़्ट करता है) की फ़ाउंडर भी हैं. 

 उनके वेंचर के पीछे की कहानी   

एना एलिज़ाबेथ जॉर्ज कहती हैं कि, “मुझे फ़ैशन डिज़ाइनिंग और बेकिंग में दिलचस्पी थी. मेरे फ़्लोरल और बेकिंग वेंचर के नाम के पीछे भी एक स्टोरी है. 'Jacob' मेरे नानाजी का नाम था, जिनका 33 साल पहले पेरुमन रेल हादसे में निधन हो गया था. वो हमेशा से चाहते थे कि उनकी एक बेकरी हो और उनके इस सपने को पूरा करने के लिए मैंने अपने बेकिंग और फ़्लोर वेंचर का नाम "Jacob" रखा”.

विश्व की पहली एडिबल साड़ी 

World's First Edible Saree : एना ने साल 2020 में एक कपकेक हैंपर बनाया था, जिसकी चर्चा पूरे शहर भर में हुई थी. ग्राहकों को ये काफ़ी पसंद आया था और इसे कई अख़बारों ने कवर भी किया था. इसी उत्साह को बरक़रार रखते हुए, वो कुछ और बड़ा क्रिएटिव करने का सोच रहीं थीं. एना केरल की हैं, तो वो ओणम मानती हैं. अब ओणम एक ऐसा त्यौहार है, जो दक्षिण भारत में ख़ूब धूम-धाम से मनाया जाता है और एना हर साल ओणम के लिए या तो किसी दूसरे से साड़ी डिज़ाइन करवाती हैं या ख़ुद हैंड पेंट करती हैं.

लेकिन, इस साल उनके पास वास्तव में समय नहीं था. ऐना ने बताया कि, "मैं छत पर थी, जब मैंने अपनी मां की साड़ी को सूखने के लिए लटका देखा और तभी मेरे दिमाग़ में एडिबल साड़ी बनाने का विचार आया”. 

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एक हफ़्ते में बनाई एडिबल साड़ी   

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जानकर हैरानी होगी कि एना ने ये साड़ी सिर्फ़ 1 हफ़्ते में बनाई थी. उन्होंने साड़ी को अपनी रसोई में ही बनाया था और वो भी बिना किसी फै़ैंसी गैजेट या कुकिंग स्टूडियो के. उन्होंने इस साड़ी को साधारण से किचन सामग्री के साथ बनाया है. इस साड़ी को बनाने में एना ने साड़ी के बेस के लिए स्टार्च आधारित वेफ़र पेपर का इस्तेमाल किया था. स्टार्च आलू से निकाला गया था. 

वेफ़र पेपर एक A4 शीट के आकार का होता है और लगभग 100 शीट का उपयोग साड़ी की लंबाई यानी 5.5 मीटर के लिए किया गया था. वेफ़र शीट्स ने ‘कसावु’ के लिए सही बनावट हासिल करने में मदद की, जिस पर ट्रेडिशनल पैटर्न बनाने के लिए गोल्डन पाउडर का यूज़ किया गया था. इस साड़ी को बनाने में क़रीब 30 हज़ार रुपए का खर्च आया. वहीं, इस साड़ी का वजन क़रीब 2 किलो है. 

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उम्मीद करते हैं कि आपको एना एलिज़ाबेथ जॉर्ज का ये असाधारण काम (World's First Edible Saree) बेहद पसंद आया होगा.