Ye Melody itni Chocolaty Kyu Hai: किसी भी प्रोडक्ट को बेचने के लिए विज्ञापन सबसे अहम किरदार निभाते हैं. कंपनियों के पास ग्राहकों को लुभाने के लिए विज्ञापन सबसे बेहतर विकल्प होते हैं. आज ग्राहक किसी प्रोडक्ट को तभी ख़रीदता है जब तक वो टीवी पर उस प्रोडक्ट का विज्ञापन न देख ले. इसके अलावा किसी भी प्रोडक्ट के लिए उसकी टैगलाइन (Tagline) भी बेहद मायने रखती है. जब तक विज्ञापन के साथ मज़ेदार टैगलाइन न हो प्रोडक्ट अधूरा-अधूरा सा लगता है. इसीलिए हर कंपनी ग्राहकों को लुभाने के लिए विज्ञापन के साथ कैची टैगलाइन भी रखती है.

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भारत की मशहूर मल्टीनेशनल फ़ूड प्रोसेसिंग कंपनी Parle अपने कई बेहतरीन प्रोडक्ट्स के लिए जानी जाती है. ‘Parle G’, ‘Parle Kissami’, ‘Parle Monaco’, ‘Parle Hide and Seek’, ‘Parle Nutri Choice’ And ‘Parle Crack Jack’ समेत कई प्रोडक्ट्स लोगों के पसंदीदा प्रोडक्ट्स में से एक हैं. इन्हीं में से एक प्रोडक्ट ‘Parle Melody Chocolaty’ भी है. ये प्रोडक्ट्स स्लिये भी ख़ास है क्योंकि इसकी टैगलाइन (Tagline) बेहतरीन थी. इसके विज्ञापन में आपने ‘ये मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है? टैगलाइन तो सुनी ही होगी. इसकी वजह से आपने भी कभी न कभी ये टॉफ़ी ज़रूर ख़रीदी होगी.

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लेकिन क्या आप जानते हैं असल में ‘मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है? नहीं जानते हैं तो आज हम आपके लिए इसका परफ़ेक्ट साइंटिफ़िक जवाब लेकर आये हैं. तो चलिए आप भी देख लीजिए- 

दरअसल, पारले मेलोडी (Parle Melody) को चॉकलेटी बनाने में Soy-Lecithin नामक इंग्रेडिएंट सबसे अहम भूमिका निभाता है. ये न केवल इस टॉफ़ी की शेल्फ-लाइफ़ को बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि इसके शुगर क्रिस्टलाइज़ेशन और चॉकलेट की तरलता को भी नियंत्रित करता है. पारले कंपनी इस टॉफ़ी को बनाने के लिए मुख्य रूप से इसी इंग्रेडिएंट Soy-Lecithin का इस्तेमाल करता है.

Ye Melody itni Chocolaty Kyu Hai

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इसके अलावा Soy-Lecithin मेलोडी को ठोस बनाने में भी मदद करता है. जब हम इस टॉफ़ी को काटते हैं, तो हमें इसकी बनावट ठोस सी लगती है. मेलोडी एक द्वि-स्तरित कैंडी भी है जिसमें कारमेल कवरिंग और चॉकलेट कोर होता है. ये हमें अन्य कैंडी की तुलना में फ्लेवोनोइड की भरपूर डोज़ देता है. दरअसल, फ्लेवोनोइड्स के एंटीऑक्सीडेंट गुण सेरेब्रल रक्त प्रवाह में सुधार करते हैं.

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दरअसल, सोय-लेसिथिन (Soy-Lecithin) ‘कोकोआ मक्खन और कोको’ को अलग होने से बचाने में भी मदद करता है. कोकोआ मक्खन का गलनांक लगभग 34-35 डिग्री सेल्सियस होता है, जो शरीर के औसत तापमान से थोड़ा कम होता है. इस तरह कोकोआ मक्खन 23-25 ​​डिग्री सेल्सियस के सामान्य कमरे के तापमान पर ठोस रहता है, लेकिन मुंह में डालने पर तुरंत और आसानी से पिघल जाता है. ये हमें टॉफ़ी के भीतरी भाग से मिलता है जो घना होता है और हमें ‘चॉकलेट’ लगता है.