दुनिया भर में हर दिन लगभग लाखों-करोड़ों लोग मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं. कई लोगों को मंदिर जाकर शांति और सुकून मिलता है, तो वहीं कुछ लोगों को लगता है कि मंदिर जाकर उनकी सारी मुरादें पूरी हो गईं. मंदिर को लेकर सबकी अपनी अलग-अलग आस्था है. मंदिर से जुड़ी हुई धार्मिक बातें तो लगभग हर कोई जानता है, लेकिन क्या इससे जुड़े वैज्ञानिक कारण जानते हैं आप.

प्राचीन समय में मंदिर से जुड़ी हर एक चीज़ के पीछे वैज्ञानिक कारण होता था. मंदिर की स्थापना से लेकर उसकी संचरना तक, सारी चीज़ों के पीछे वैज्ञानिकों का दिमाग़ होता था. आज हम आपको बताते हैं मंदिर और उसकी पवित्रता से जुड़े कुछ ऐसे वैज्ञानिक कारण, जिससे आप अब तक अंजान थे.

1. मंदिर के लिए हमेशा वो जगह चुनी जाती है, जहां से हमें अधिक से अधिक सकारात्मक उर्जा मिल सके. एक ऐसा स्थान जहां उत्तरी ओर से सकारात्मक रूप से चुंबकीय और विद्युत तरंगों का प्रवाह हो. अकसर ऐसे स्थानों पर ही बड़े मंदिरों का निर्माण करवाया जाता है, ताकि लोगों के शरीर में अधिकतम सकारात्मक ऊर्जा मिल सके.

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2. मंदिर में भगवान की मूर्ति को गर्भ गृह के बिल्कुल बीच में रखा जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस जगह पर सबसे ज़्यादा ऊर्जा होती है. जब कोई शख़्स सकारात्मक सोच के साथ इस स्थान पर खड़ा होता है, तो सकारात्मक उर्जा उसके शरीर में पहुंच कर नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाती है.

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3. मंदिर को तीन तरफ़ से बंद रखने का सबसे बड़ा कारण है कि इससे ऊर्जा का असर ज़्यादा बढ़ता है. भगवान की प्रतिमा के सामने दिया जलाने से दीप उष्मा की ऊर्जा का वितरण होता है. वहीं फूल, कपूर और धूप की ख़ूशबू से मन को शांति और तनाव से मुक्ति मिलती है.

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4. मंदिरों के प्रवेश द्वार पर घंटा टंगा रहता है, जिसे बजाने से निकलने वाली आवाज़ सात हीलिंग सेंटर्स को सक्रिय कर देती है. जिससे व्यक्ति की सारी समास्याएं ख़त्म हो जाती हैं.

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5. मूर्तियों पर चढ़ने वाले चरणामृत को भगवान के आर्शीवाद के रूप में गृहण किया जाता है. आपने देखा होगा कि मंदिर में मिलने वाले जल में तुलसी के पत्ते मिले रहते हैं और मंदिर का चैंबर हमेशा कपूर की सुगंध से महकता रहता है. ऐसा माना जाता है कि ये दोनों चीज़ें सर्दी-खांसी जैसी बीमारियों से लड़ने में सहायक होती हैं.

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6. लगभग हर मंदिर में भगवान की पूजा और दर्शन करने के बाद परिक्रमा करने का नियम होता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, मंदिर में परिक्रमा करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और मन काफ़ी शांत रहता है.

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7. कभी सोचा है कि मंदिर के अंदर नंगे पैर प्रवेश क्यों करते हैं? दरअसल, इसके पीछे भी एक वैज्ञानिक कारण है. प्राचीन समय में मंदिर की फ़र्शों का निर्माण इस प्रकार किया जाता था कि इससे इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगे उत्पन्न हो सकें. जिससे जब कोई नंगे पैर फ़र्श पर चले, तो उसके पैरों के माध्यम से अधिकतम ऊर्जा उसके शरीर में प्रवेश कर सके.

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8. मंदिरों में साफ़-सफ़ाई का ध्यान भी इसलिए रखा जाता है कि गंदगी के माध्यम से नकारात्मक उर्जा मंदिर के अंदर प्रवेश न हो सके.

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9. मंदिर में माथे पर लगने वाला कुमकुम का टीका मानव शरीर में ऊर्जा और एकाग्रता का स्तर बनाए रखता है.

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10. मंदिर का कलश पिरामिड की आकृति का होता है, जो ब्रम्हांडीय ऊर्जा तरंगों को अवशोषित करके नीचे बैठने वालों को लाभ पहुंचाता है.

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