Two Storey Houses Are Not Allowed In This Village: भारत को गांवों का देश कहा जाता है. हमारे देश की लगभग दो-तिहाई आबादी गांवों में रहती है. तभी तो ये कहा जाता है कि भारत की आत्मा तो उसके गांव में ही बसती है. 

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हर गांव की अपनी-अपनी ख़ासियत भी है. किसी की परंपरा अनोखी है तो किसी के नियम. यहां के हर गांव की अलग कहानी है. आज हम आपको ऐसे ही एक गांव के बारे में बताएंगे. ये ऐसा गांव है जहां के लोग दो मंजिला घर ही नहीं बनाते. इस गांव का हर घर एक ही मंजिल का है. 

दो मंजिला घर इस गांव में न कहीं दिखेगा और न ही बनाने की अनुमति है. क्या है इस गांव का रहस्य, चलिए जानते हैं.

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चंडीगढ़ के पास है ये गांव

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ये अनोखा गांव है पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ के पास. माजरी नाम के इस गांव में घर तो बहुत हैं, लेकिन एक भी घर आपको दो मंजिला नहीं मिलेगाा. ऐसी मान्यता है कि अगर गांव का कोई भी घर के ऊपर पहली मंजिल का निर्माण करेगा तो उस घर को नुकसान होगा. इसलिए यहां जब भी कोई नया घर बनता है तो उसे नींव डालकर बस एक ही स्टोरी यानी मंजिल का बनाया जाता है. 

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जयंती माता का मंदिर है यहां

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ऐसा करने के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. माजरी में माता जयंती देवी का मंदिर है. यहां 150 से भी अधिक सीढिय़ां चढ़ कर उनकी पिंडियों के दर्शन करने के लिए जाना पड़ता है. कहते हैं बाबर के समय में हथनौर का नाम का राजा था. उसके 22 भाई थे उनमें से एक की शादी हिमाचल के कांगड़ा के राजा की बेटी से हुई. कांगड़ा से आई राजकुमारी माता जयंती देवी की बहुत बड़ी भक्त थी. 

कांगड़ा की राजकुमारी के साथ आई थी माता

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वो माता की पूजा करने के बाद ही भोजन करती थी. शादी होने की बात जब उसे पता चली तो उसने माता से गुहार लगाई और पूछा कि अब वो उनसे इतनी दूर कैसे रह पाएंगी. तब माता ने उन्हें सपने में दर्शन दिए और कहा कि उसकी डोली के साथ ही माता की डोली जाएगी. अगर ऐसा न हुआ तो डोली उठेगी ही नहीं. हुआ भी बिल्कुल ऐसा. राजकुमारी जब शादी के बाद विदा होने लगी तो उसकी डोली उठी नहीं. फिर उसने सारी कहानी बताई. तब माता के साथ उसकी डोली उठाई गई. 

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उसके पिता ने बेटी के साथ कुछ पुजारी भी भेजे ताकि माता के मंदिर में ठीक से पूजा हो सके. उसी वंश के पुजारी माता की पूजा किया करते थे. राजकुमारी और उनके पति की मृत्यु के बाद बच्चों ने माता की पूजा करनी बंद कर दी. तब वो मनी माजरा के जंगलों में रहने वाला डाकू गरीबों के सपने में आई. कहते हैं कि माता ने आदेश दिया कि जाकर हथनौर के वंशजों की रियासत को ख़त्म कर दो. 

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उसने राज्य में काफ़ी लूटपाट मचाई और उसे काफ़ी खजाना हासिल हुआ. उसने सोचा कि माता कि वजह से ही सब कुछ हुआ है, तो वो माता की पिंडियों को भी ले गया.  वो उनकी दिन-रात पूजा करता. इस तरह माता के आशीर्वाद से वो राजा बन गया. राजा बनने के बाद उसने शिवालिक की पहाड़ियों के नीचे जयंती नदी के किनारे एक भव्य मंदिर बनाया गया. 

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ये मंदिर लोगों के बीच काफ़ी प्रसिद्ध है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. माजरी गांव के लोगों ने कई बार पूजा और भंडारा करवा कर पर पर्चियां निकाली ताकि घर दो मंजिले बनाए जा सकें, लेकिन हर बार पर्ची में ना ही निकलता है. इसलिए अब यहां कोई दो मंजिला घर बनाने की सोचता ही नहीं.