आज भले ही बेंगलुरु (Bengaluru) को दुनिया टेक हब के रूप में जानती हो, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के बाद इसे बॉक्सर्स हब के रूप में जाना जाता था. तब दुनियाभर के बॉक्सर लंबा सफ़र कर बेंगलुरु पहुंचते थे. इन्हीं में से एक बॉक्सर की कहानी आज हम आपके लिए लाए हैं, जिसके चर्चे पूरे बेंगलुरु में 1930 के दशक में होते थे. लोग उसकी फ़ाइट देखने के लिए दूर-दूर से आते.

बेंगलुरु की बॉक्सिंग का सुनहरा दौर

Gunboat Jack
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हम उस दौर की बात कर रहे हैं जब बेंगलुरु पूरी दुनिया में बॉक्सिंग के लिए जाना जाता था. लगभग 20 साल 1930-50 तक बेंगलुरु में बॉक्सिंग अपने सुनहरे दिनों को जी रही थी. रिंग के इर्द-गिर्द शाम को बॉक्सर्स और दर्शकों का जमावड़ा लगा रहता था. इन फ़ाइट्स का आयोजन रेजीडेंसी रोड-ब्रिगेड रोड जंक्शन पर किया जा था जिसे आज ओपेरा थियेटर के नाम से जाना जाता है.

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अमेरिका से भारत आया एक बॉक्सर  

Gunboat Jack and Bangalore
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अमेरिका की नेवी में रहे एक अमेरिकन-अफ़्रीकन बॉक्सर भी दूसरे विश्व युद्ध के बाद यहां आए. इनका नाम था Gunboat Jack. उसके बारे में कहा जाता है कि वो अपने शिप से कूद कर बैंगलोर पहुंचा था. यहां आकर उसने बहुत बॉक्सिंग की और कई फ़ाइट्स अपने नाम की. कहते हैं वो अपने से 4 गुना ज़्यादा वज़न के आदमी को नॉकआउट करने में माहिर था.

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हाथों-हाथ बिक जाती थी इनके मैच की टिकट  

Gunboat Jack and Bangalore boxers History in hindi
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इस बॉक्सर की तकनीक कमाल की थी. कुछ लोगों का कहना है कि अगर वो अमेरिका से यहां न आए होते तो विश्व चैंपियनशिप जीत लेते. वो कहते हैं ना किसी का नुकसान किसी के फ़ायदा होता है. ऐसा ही गनबोट जैक के केस में भी है. यहां अमेरिका नुकसान भारत के फ़ायदे के रूप में सामने आया. इनके मुकाबले को देखने के लिए भीड़ अपने आप खिंची चली आती थी. रिंग के पास की टिकट उस समय 6 रुपये की बिकती.

मौत के कुएं में भी किए करतब

Gunboat Jack and Bangalore
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यही नहीं Gunboat Jack देश में मौत के कुएं में मोटरसाइकिल चलाने वाले पहले जांबाजों में से भी एक थे. वो बॉम्बे सर्कस और मद्रास के फ़ेस्टिवल्स के दौरान ये काम भी करते थे. लोग इन्हें GBJ के नाम से भी जानते थे. बताया जाता है कि वो आभूषण और सॉस जैसे उत्पादों का विज्ञापन करने वाले भारत के पहले बॉक्सर थे.

मुफलिसी में बीते अंतिम दिन  

Gunboat Jack and Bangalore boxers History
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इनकी एक बेटी थी जिसका जन्म कराची में हुआ था. इनकी बेटी Shirin Bobby को प्रिंसेस अमीना के नाम से भी जाना जाता है. वो एक मशहूर बेली डांसर थीं. Gunboat Jack की कुछ बुरी आदतें भी थीं, वो शराबी और जुआ खेलने के आदि थे.

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आज़ादी के बाद बेंगलुरु में बॉक्सिंग का क्रेज़ ख़त्म होता गया. गनबोट जैक के बुरे दिन इसी के साथ शुरू भी हुए. 1960 में बॉक्सिंग छोड़ उन्होंने Basco बार में बाउंसर का काम करना शुरू कर दिया. कुछ दिन ऐसे ही बिताने के बाद वो अमेरिका वापस लौट गए. यहीं उनकी मृत्यु हो गई.

गनबोट जैक बेंगलुरु और भारतीय बॉक्सिंग के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, जिसे आज भी याद किया जाता है. वो एक लिविंग लेजेंड थे जिन्होंने भारत में बॉक्सिंग के ख़ूब नाम कमाया था.