'पीयू चित्रा'

हिंदुस्तान की वो एथलीट, जो अब तक देश के लिये अंतराष्ट्रीय स्तर पर चार स्वर्ण पदक जीत चुकी है. हांलाकि, ये सम्मान और प्रतिष्ठा हासिल करना देश की इस बेटी के लिये आसान न था. खेतों में दौड़ने से लेकर अंतरराष्ट्रीय दौड़ में सफलता हासिल करने तक, पीयू चित्रा का सफ़र काफ़ी मुश्किलों भरा रहा है.

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पीयू एक बेहद ग़रीब परिवार में पैदा हुईं. घर में आमदनी का एकमात्र ज़रिया मजदूरी करना था. ऐसे में उन हालात से निकल कर ऊंचाई और ख़्याति तक पहुंचने का सफ़र आसान नहीं रहा. उन्नीकृष्णन और वसंत कुमारी की बेटी पीयू ने अपनी विपरीत परिस्थितियों से लड़ने के लिए जान झोंक दी.

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पीयू के जीवन में ऐसे भी दिन रहे, जब परिवार के किसी भी सदस्य को कोई काम नहीं मिला और पूरे परिवार ने बचे-खुचे खाने पर गुज़ारा किया. कुछ रातें ऐसे भी रहीं जब पीयू भूखे पेट सोई, लेकिन हर सुबह 5.45 पर उठकर स्कूल जाना और शारीरिक शिक्षा में भाग लेने के नियम को कुछ भी नहीं डिगा पाया.

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ज़िंदगी की कठिन राहों में जीत का परचम लहराने वाली पीयू अब 2020 में इस जीत को कायम रखने की कोशिश में जुटी हैं.

अपनी परिस्थितियों से लड़ने से लेकर, देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने तक की पीयू की यात्रा बेहद अद्भुत और साहसिक रही. पीयू चित्रा हम सभी के लिए प्रेरणा हैं.

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उन्होंने अपने परिवार की किस्मत बदलने का दृढ़ संकल्प किया था. उनकी विपरीत परिस्थितियां ही उनकी प्रेरणा थीं, जिसने उन्हें अपने सपनों के लिए लड़ सकने की ताक़त दी. ऐसी परिस्थितियां कभी भी आसान नहीं होतीं, लेकिन चित्रा ने सारी मुश्किलें पार कर खुद को साबित कर दिखाया.

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2016 में पीयू ने 1500 मीटर दौड़ में हिस्सा लेकर दक्षिण एशियाई खेल में स्वर्ण पदक जीता. अपनी इसी जीत को जारी रखते हुए उन्होंने एशियन्स गेम्स में 2017 में भी दो मेडल जीते. पीयू की जीत का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा और 2018 में हुए एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता.

वहीं दोहा में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी पीयू ने 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रौशन किया.

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