'जल्दी घर आ जाया करो. 9 बजे के बाद सेफ़ नहीं है'
'अकेले मत निकलना. वहीं रुको. मैं पिक करने आ रहा हूं'
'क्या ? पार्टी रात 11 बजे शुरू होगी. नहीं, कोई ज़रुरत नहीं है जाने की'

एक नहीं, न जाने कितनी बार हमने ऐसी बातें सुनीं होंगी. है न. देश में महिलाओं की सुरक्षा हमेशा से चिंता का एक प्रमुख विषय जो रहा है.

आये दिन अख़बार के पन्नों में छेड़छाड़ और बलात्कार जैसी घटनाएं अपनी जगह बना ही लेती हैं. अगर कोई मामला तूल पकड़ लेता है और ज़्यादा हंगामा हुआ, तो न्यूज़ चैनल्स के स्टूडियो में बैठ-कर राजनीतिक दलों के प्रवक्ता भी हंगामा कर लेते हैं. लेकिन क्या मीडिया ट्रायल से महिलाओं की सुरक्षा में सुधार हुआ है ? आंकड़े कुछ और कहते हैं.

अगस्त 2017 में गृह राज्य मंत्री हंसराज अहिर द्वारा पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन सालों में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. अब इसे क़ानून की असमर्थता कहिये या लोगों की टुच्ची मानसिकता, सच तो ये है कि बेबाक घूम रहे ऐसे मनचलों को शुरुआत में ही रोकना ज़रूरी है.

छेड़छाड़ और बलात्कार जैसी घिनौनी हरकत की शुरुआत होती है Stalking से. भारतीय क़ानून के अंतर्गत ये एक गंभीर अपराध माना गया है. एक महिला होने के नाते, अगर आप को शक है कि कोई इंसान आपका पीछा कर रहा है तो इस हरकत को नज़रअंदाज़ कर के आगे बढ़ जाना कोई समझदारी नहीं. बल्कि ऐसा करने से आप न चाह कर भी उस इंसान को अपराधी बनने में मदद कर रही हैं. ऐसे में अपराधी की हिम्मत बढ़ती है और आगे जा कर वो रेप भी कर सकता है. तो अगर आपको कोई Stalk कर रहा है, ख़ामोश मत रहिये. उसकी शिकायत दर्ज करिये.

Stalking से जुड़ा क़ानून क्या है ?

धारा 354D के तहत, Stalking के अपराध में न सिर्फ़ भारी जुरमाना बल्कि एक साल से लेकर तीन साल तक की जेल की सज़ा का प्रावधान भी है.

Stalker किसे माना जायेगा ?

क़ानून के मुताबिक, रुचि न दिखाने के स्पष्ट संकेत के बावजूद भी, किसी महिला का पीछा करना या उससे संपर्क बनाने की कोशिश करने को Stalking माना गया है. ये मोबाइल, इंटरनेट और ईमेल जैसे इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन पर भी लागू होता है. TOI में आयी ये रिपोर्ट बताती है कि National Crime Records Bureau के डाटा के अनुसार, वर्ष 2014 में 4699, 2015 में 6266 और 2017 में 7132 मामलों में Stalking की शिकायत दर्ज कराई गयी.

Stalkers से बचने के लिए क्या करना चाहिए ?

- अपने लोकल पुलिस थाने का नंबर हमेशा मोबाइल में सेव करके रखिये.

- यदि आप स्मर्टफ़ोन इस्तेमाल करती हैं, तो कुछ अच्छे Security Apps इनस्टॉल कर लीजिये.

- अगर आपको शक होता है कि कोई आपका पीछा कर रहा है, तो तुरंत अपने किसी जानकार को कॉल कर के अपनी लोकेशन के बारे में बताएं. कम-से-कम बताने की एक्टिंग ज़रूर करें, जिसकी आवाज़ Stalker तक पहुंच जाए.

- कोई आपको ज़बरदस्ती छूने की कोशिश करे, तो ज़ोर से चिल्लाइये ताकि आस-पास की भीड़ आपकी मदद के लिए पहुंच जाए.

- ऑनलाइन Stalking के मामले में Screenshots सेव करिये.

- ज़रूरत पड़े और मुमकिन हो तो Stalker की फ़ोटो खींच लीजिये या वीडियो रिकॉर्ड करें.

ये सच है कि महिला सुरक्षा से सम्बंधित मामलों में कई बार अपराधी आराम से बरी हो जाता है और पीड़ित को इंसाफ़ नहीं मिलता लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि हम क़ानून द्वारा मिले अधिकारों का प्रयोग न करें. डर कर चुप बैठ जाना बुज़दिली है. कभी अपने आपको बेसहारा महसूस न करें. आवाज़ उठाएं, शिकायत दर्ज कराएं और इस देश की हज़ारों लाखों महिलाओं की सुरक्षा में अपना योगदान दें.

एक शिक्षित नागरिक की तरह आपको अपने अधिकारों की पूरी जानकारी होनी चाहिए. इस पोस्ट को शेयर करके ग़ज़बपोस्ट की इस कोशिश 'साड्डा हक़' में हमारा साथ दीजिये. यदि कोई ऐसा विषय हो, जिसके बारे में आप जानना चाहते हों, या आपको लगता हो कि बाक़ी लोग अनजान हैं और उनके लिए जानकारी लाभदायक होगी, तो हमें ज़रूर बताइये. हम उस मुद्दे को अपने आने वाले लेख में उठाने की कोशिश करेंगे.