आजकल गंदगी हर शहर में इतनी ज़्यादा अपने हाथ-पैर पसार चुकी है कि हर जगह मच्छर ही मच्छर देखने को मिल रहे हैं. ये मच्छर इतने ढीट हो गए हैं कि इन पर कॉइल का असर ही होना बंद हो गया है. इन्हें किसी भी चीज़ से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है. मगर ख़ुद को शाणा समझने वाले इन मच्छरों से भी बड़े एक शाणे ने इन्हें मौत के घाट उतारने का इतना पुख्ता बंदोबस्त किया, जो आप सबका फ़ेवरेट बन गया, वो है मच्छर मारने वाला रैकेट.

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हालांकि हम सबको पता है कि ऐसी चीज़ें चीन की ही देन होती है, लेकिन क्या आपको इसके पीछे छुपे नाम के बारे में पता है कि किसने इतना तोड़ू इंतज़ाम निकाला. अगर नहीं पता है तो अभी बता देते हैं, वो हैं त्सो आई शिह (Tsao-I Shih). इन्होंने ही इस बैडमिंटन जैसे दिखने वाले रैकेट को बनाया है. इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, त्सो ने इस रैकेट को 1996 में बनाया और पेटेंट कराया था. 

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Tsao को ताइवान के ताइपेई के रहने वाले हैं. इनके नाम पर कुछ और पेटेंट हैं. इन्होंने जो मच्छर मारने वाला रैकेट बनाया है इसमें दो जाल हैं, जिसमें मच्छर फंसने के बाद मरता ज़रूर है. मच्छर जब मरता है तो चट-चट की आवाज़ आती है. वैसे तो किसी को मारना अच्छा नहीं होता है, लेकिन मच्छर को मारना कोई ग़लत काम नहीं है. इस रैकेट में 500 से 1500 वोल्ट का वोल्टेज होता है.

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एक बात का ध्यान रखें इन रैकेट को छोटे बच्चों से दूर रखें क्योंकि इससे निकलने वाला करंट बच्चों के लिए ख़तरनाक हो सकता है यहां तक कि बड़ों को भी बचना चाहिए.