
ये भी पढ़ें: किडनी वैली: नेपाल का वो गांव जहां ज़्यादातर लोग पूरी ज़िन्दगी एक किडनी के सहारे जीते हैं
इस गांव का नाम गांक्सी डोंग है. ये आत्मनिर्भर गांव डोंग लोगों का घर है, जो चीन में 56 मान्यता प्राप्त जातीय अल्पसंख्यकों में से एक हैं. इस गांव में बच्चे से लेकर बूढ़े तक कुंग-फ़ू के मास्टर हैं. यही वजह कि ये गांव दुनियाभर में फ़ेमस हो गया है. लोग अब इस गांव को कुंग-फ़ू विलेज (kung-Fu Village) बुलाने लगे हैं.

गांव में लोग अपने खेतों, घरों से लेकर मंदिर तक में कुंग-फ़ू का हर रोज़ अभ्यास करते हैं. यहां अलग-अलग शैलियों में इसकी प्रैक्टिस की जाती है. अपने हुनर में लगातार निखार लाने के लिए ये लोग एक-दूसरे लड़ते भी हैं. इस गांव में कुंग-फ़ू की प्रैक्टिस का इतिहास काफ़ी पुराना है. हालांकि, ये मार्शल आर्ट यहां कबसे लोकप्रिय हुई, इसकी ठीक जानकारी किसी को नहीं है.

ये लोग हाथ-पैरों के साथ ही लाठी और तलवारों का भी इस्तेमाल करते हैं. इनके मूव्स ड्रेगन, सांप, बाघ और तेंदुए जैसे जानवरों से प्रेरित होते हैं. ये लोग एक-दूसरे को सिखाते भी हैं. यहां सभी के लिए कुंग-फू सीखना ज़रूरी है. इसमें लड़कियां भी अपवाद नही हैं. उनसे भी यही अपेक्षा रहती है कि वो कुंग-फू की किसी भी शैली में एक्सपर्ट बनें.

ये स्पष्ट नहीं है कि वे कैसे तय करते हैं कि कौन सी कुंग फ़ू शैली सीखनी है, क्योंकि शुरुआत से ही गांव में कई अलग-अलग शैलियों का अभ्यास किया जाता है. कुंग-फ़ू की अलग-अलग शैलियां इस गांव में कैसे विकसित हुईं, इसे लेकर अलग-अलग थ्योरी हैं.


वहीं, एक दूसरी थ्योरी ये है कि जब शुरुआत में लोग इस गांव में बसे, तो पड़ोसी गांव से लूटपाट के लिए हमले होते थे. ख़ुद को बचाने के लिए ग्रामीणों ने दो मार्शल आर्ट एक्सपर्ट्स को बुलाया और उनसे ट्रेनिंग ली. फिर उन्होंने बाकी गांव वालों को भी ये हुनर सिखाया. हालांकि, ये सीखने-सिखाने की ये परंपरा काफ़ी लंबे वक़्त से चली आ रही है. ऐसे में इसकी शुरुआत की कोई सटीक थ्योरी अब तक सामने नहीं आई है.

इन सबसे बीच एक बात जो यक़ीन के साथ कही जा सकती है, वो ये है कि गांव वालों के लिए खेती के बाद सबसे महत्वपूर्ण चीज़ कुंग-फू ही है. सदियों से चली आ रही इस परंपरा को वो आज भी पूरे मन के साथ फ़ॉलो कर रहे हैं और अगली पीढ़ी तक भी पहुंचा रहे हैं.