बॉलीवुड फ़िल्में देखने के बाद हम सभी के दिमाग़ में जल्लादों के प्रति एक अलग छवि बन चुकी है.

काले कपड़े, माथे पर काला टीका और पहलवान जैसा दिखने वाला इंसान.

हमारी इस छवि के हिसाब से जल्लाद एक गुस्सैल और क्रूर आदमी होगा. हालांकि अगर आप इन फ़िल्मी-बनावटी दायरों से बाहर आएं, तो देखेंगे कि गुनाहगार को फांसी पर लटकाने वाला जल्लाद भी एक आम इंसान ही होता है.

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हमारे देश में सबसे बड़े गुनाह की सज़ा फांसी है. जेल अधीक्षक, एग्ज़क्यूटिव मजिस्ट्रेट, डाॅक्टर और जल्लाद इन चार लोगों की मौजदूगी में कड़े नियम के तहत किसी अपराधी को फांसी के फंदे पर लटका कर उसे सज़ा-ऐ-मौत दी जाती है, लेकिन फांसी देने से पहले जल्लाद अपराधी के कान में चंद शब्द कहता है.

जानते हैं वो क्या है?

मुजरिम को फांसी पर लटकाने से पहले जल्लाद उनसे धीरी आवाज़ में कहता, 'हिंदू भाई को राम-राम और मुस्लिम को सलाम. हम तो हुकुम के गुलाम हैं, हम क्या कर सकते हैं. मुझे माफ़ कर देना.' इतना कहने के बाद वो फांसी का फंदा खींच देता है.

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रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फांसी देने के लिये सिर्फ़ दो जल्लाद हैं, जिनको हर महीने लगभग 3 हज़ार रुपये सैलरी अदा की जाती है. वहीं अगर अपराधी आतंकवादी है, तो उसके लिये उन्हें थोड़े ज़्यादा पैसे दिये जाते हैं. 

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