आजतक इंसान ने पृथ्वी के लगभग हर कोने की खोज की है. यही नहीं, बल्कि हमने इसके सबसे कठिन इलाकों पर विजय भी प्राप्त की है. इन सबके बावजूद अबतक हम धरती के आंतरिक खंड (Inner Core) के बारे में बहुत कुछ नहीं जानते हैं.

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दरअसल, पृथ्वी की तीन प्राथमिक पर्तें होती हैं, जो कि बाहर से आंतरिक दिशा की ओर हैं. पहली भूपटल (CRUST), दूसरी प्रवार (MANTALE) और तीसरी क्रोड (CORE). इसके साथ ही पृथ्वी का आंतरिक खंड आंतरिक कोर कहलाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, ये सूरज की तरह पृथ्वी की सबसे गर्म सतह होती है, फिर ये नहीं पिघलता. सदियों तक वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य बना हुआ था.

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पृथ्वी के आंतरिक कोर में एक कोर होता है, जो कभी नहीं पिघलता. जबकि ये सूर्य से भी गर्म होता है. अबतक की इस सबसे बड़ी पहेली को हल किया जा चुका है.

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स्वीडन के KTH Royal Institute of Technology के भौतिक विज्ञान के साइंटिस्ट Dr. Anatoly Belonoshko बताते हैं कि पृथ्वी के कोर में सतह के वज़न के बराबर 3.5 मिलियन अधिक दबाव होता है और तापमान 6,000 डिग्री सेल्सियस (10,800 डिग्री फ़ारेनहाइट) से कहीं अधिक. सख़्त तापमान और वज़न के कारण इसके कण गति कर रहे हैं.

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यही आंतरिक कोर में परमाणु अस्थिरता का कारण बनता है और लौह क्रिस्टल को द्रव्य में विकृत करता है. Inward Core के किनारे पर, क्रिस्टल संरचना की बिट्स लगातार पिघल जाती है और उच्च दबाव के कारण पुन: आपस में मिलने के लिए फैल जाता है. साथ ही ऊर्जा वितरण चक्र क्रिस्टल केंद्र को मजबूत रखता है.

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वैज्ञानिकों ने रिसर्च के लिए Triolith कंप्यूटर का इस्तेमाल किया और पाया कि उच्चतम तापमान पर भी उच्च आयाम (High Amplitude) के कारण अणु (Atoms) गति बनाए हुए हैं. इसके साथ ही Dr. Belonoshko इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आमतौर पर व्यापन (Diffusion) क्रिस्टल संरचनाओं को उन्हें द्रव्य में बदलने के लिए नष्ट करता है. हालांकि, ये Diffusion कोर की सख़्त संचरना के सुरक्षा की अनुमति देता है.

वाकई Swedish Scientists द्वारा सुलझाई गई ये पहेली बेहद रोचक है.

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