हिंदी सहित्य में कई जासूसी कहानियां लिखी गई हैं. सबसे पहले इन कहानियों को गोपाल राम गहमरी ने लिखना शुरू किया था, वो एक जासूसी लेखक थे. कहा जाता है कि उनकी कहानियों को पढ़ने के लिए लोगों ने हिंदी तक सीखी थी. ऐसी ही एक जासूसी कहानी है ब्योमकेश बक्शी जिसे शरदेन्दू उपाध्याय ने लिखा था. इसके अलावा जासूसी पर कई नाटक और फ़िल्में भी बन चुकी हैं. इन सबमें कहानियों का आधार पुरूष ही रहे हैं.

5 Female Detectives in Indian Literature
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मगर क्या आप भारतीय हिंदी साहित्य की महिला जासूसों के बारे में जानते हैं. अगर आप जानते होंगे तो मिस मार्पल, नैन्सी ड्रू और एजेंट स्टारलिंग के बारे में ज़्यादा सुना होगा. भारतीय महिला जासूसों के नाम शायद ही सुने हों, जो आज हम आपको बताएंगे हिंदी साहित्य की उन भारतीय महिला जासूसों पात्रों के बारे में जिनके इर्द-गिर्द हिंदी साहित्य की एक से बढ़कर एक कहानियां लिखीं गईं.

1. सुधा गुप्ता, अम्बाई

तमिल लेखिका सीएस लक्ष्मी, जिन्हें उनके Pen Name अम्बाई के नाम से भी जाना जाता है. ‘Sudha Gupta Investigates: A Meeting on the Andheri Overbridge’. नामक तीन उपन्यासोंस लिखी हैं, जिसकी कहानी बुज़ुर्ग सुधा गुप्ता के इर्द-गिर्द घूमती है.

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एक महिला लेखक द्वारा लिखा गया एक महिला का जासूसी चरित्र ब्योमकेश जैसी कहानियों से काफ़ी अलग था. इसमें ये दिखाया गया कि एक महिला समाज का सामना कैसे करती है? कहानी में एक महिला जासूस अपने इंस्पेक्टर दोस्त गोविंद शेलके के साथ अनौपचारिक रूप से काम करती है, उसका दोस्त सच या झूठ, काले या सफ़ेद मामले से नहीं, बल्कि व्यक्तियों की भावनाओं और मानवीय भावनाओं के आधार पर केस को देखता है. इसके अलवा, यौन शोषण और घरेलू हिंसा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी सवाल उठाए गए थे.

2. लल्ली, कल्पना स्वामीनाथन

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कल्पना स्वामीनाथन के उपन्यास लल्ली में पहली बार 1997 में Cryptic Death के बारे में लिखा गया है. ये एक पुलिस फ़ोर्स रिटायर सेक्सोज़ेरियन की कहानी थी. स्टाइलिश जासूस लल्ली अपनी भतीजी सीता के साथ अपराध को बहुत ही सामान्य तरीक़े से ढूंढ निकालती थी. वो इंसानों की लालच और ईर्ष्या जैसे मुद्दों को दर्शाती थीं. उनमें क्वॉन्टेसिव डिटेक्टिव का हर गुण था. Murder in Seven Acts: Lalli Mysteries’ में उनकी नवीनतम कहानी है, जिसमें वो एक सीरियल किलर का सामना करती है, जो मुंबई के कंदवाडी स्लम के बच्चों पर हमला करता है.

3. मितिन माशी, सुचित्रा भट्टाचार्या

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सुचित्रा भट्टाचार्य की प्रज्ञापारमिता मुखर्जी या मितिन माशी बंगाली कहानियों को पाठकों में बहत कहानी है. उनकी इस उपन्यास के तीसवीं कहानी में मितिन ढाकुरिया में अपने पति पार्थ और बेटे बंबुम के साथ रहती है और एजेंसी थर्ड आई के लिए एक निजी जासूस के रूप में काम करती है, जिसकी कोलकाता पुलिस द्वारा बहुत प्रशंसा की जाती है. मितिन, भतीजी तुपुर के साथ पहले से ही एक सफ़ल जासूस के रूप में ख़ुद को साबित कर चुकी है.

21वीं सदी की जासूस फ़ेलुदा ‘Mogojastro’ और ‘Brain-Weapon’ की शक्ति पर विश्वास करती थी. मितिन माशी, इनकी पहली उपन्यास 'Sarandai Saitan', में थीं, जो बंगाली साहित्य में बहुत कम महिला जासूसी पात्रों में से एक है.

4. Super Spy Gulabi, Jane De Suza

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Jane De Suza की 'गुलाबी' बाकी जासूसी उपन्यासों से बिल्कुल अलग है. झारखंड की रहने वाली गुलाबी कभी-भी जासूस नहीं बनना चाहती है. मगर उसके पति की खोज उसे मुंबई ले आती है. फिर वो धीरे-धीरे अपराधियों की खोज में ख़तरनाक लोगों के बीच फंसती जाती है. बड़े शहर में छोटे शहर की एक महिला की ये कहानी बहुत दिलचस्प है.

5. परवीन मिस्त्री, सुजाता मैसी

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सुजाता मैसी की 'परवीन मिस्त्री' में आज़ादी से पहले के भारत को दो कहानियों में दर्शाया गया है, पहली 'द विडोज़ ऑफ़ मालाबार हिल' और दूसरी 'द सतापुर मूनस्टोन'. क़ानूनी मुद्दों के रूप में शुरू होने वाली दोनों कहानियों का मुख्य किरदार अपने पिता की लॉ फ़र्म में एक वक़ील है, जो ख़ुद को हत्या के रहस्यों और पारिवारिक रहस्यों के बीच फंसा महसूस करती है. परवीन मिस्त्री का सबसे पेचीदा हिस्सा ये है कि उनका किरदार बहुत हद तक कॉर्नेलिया सोराबजी पर आधारित है, जो बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट करने वाली पहली भारतीय महिला थीं, जो ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय न केवल भारत की पहली लॉ स्टूडेंट थीं, बल्कि ब्रिटेन की भी थीं.

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