मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक मंदिर है जो सदियों पुराना है. इसका नाम है चौसठ योगिनी मंदिर. ये संभवत: भारत का एकमात्र मंदिर जिसमें भगवान शिव और पार्वती के विवाह की प्रतिमा स्थापित है. इस मंदिर के इतिहास से जुड़ा एक दिलचस्प क़िस्सा आज हम आपके लिए लेकर आए हैं. 

ये क़िस्सा मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब से जुड़ा है, जिसने इस मंदिर को तोड़ने की कोशिश की थी. 

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मंदिर का इतिहास

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ये मंदिर नर्मदा नदी के भेड़ाघाट में 70 फ़ुीट ऊंचे एक पहाड़ पर बना है. इस मंदिर को 10वीं शताब्दी में कल्चुरी राजवंश के राजा युवराजदेव प्रथम ने बनवाया था. कहते हैं कि यहां भगवान शिव और पार्वती भ्रमण करने आए थे तो विश्राम के लिए रुके थे. इस मंदिर में 81 योगिनियों की मूर्तियां भी हैं. इनका निर्माण भी युवराजदेव ने इनका आशीर्वाद पाने के उद्देश्य से किया था.   

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कभी था तंत्र साधना का केंद्र

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भारत में 4 प्रमुख चौसठ योगिनी मंदिर हैं, दो ओडिशा में और दो मध्य प्रदेश में. 64 योगिनियों को देवी शक्ति के अवतार के रूप में पूजा जाता है. 12वीं शताब्दी में गुजरात की महारानी गोसल देवी जो शैंव थीं उन्होंने यहां गौरी शंकर के मंदिर का निर्माण करवाया था. इस मंदिर को कभी तंत्र साधना का केंद्र भी माना जाता था. यहां तंत्र विद्या सीखने के लिए देश-विदेश से लोग आते थे.   

औरंगज़ेब ने की थी तोड़ने की कोशिश

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पत्थरों से बने चबूतरे पर ये मंदिर बना है. इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको क़रीब 150 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. इसके त्रिभुजाकार कोणों पर योगिनियों की मूर्तियां लगी हैं जिनमें से कुछ खंडित हैं. कहते हैं कि जब औरंगजे़ब ने जबलपुर पर हमला किया था तब उसने इस मंदिर को धवस्त करने की कोशिश की थी. उसने बाहर की मूर्तियों को नष्ट कर दिया लेकिन गर्भ गृह की मूर्तियों को छू न सका. लोगों का मानना है कि उसे गर्भ गृह के अंदर कुछ दैवीय चमत्कारों को देख डर गया और दबे पांव वापस लौट गया.   

कैसे पहुंचे 

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64 योगिनी मंदिर को लेकर एक और मान्यता ये है कि मंदिर तक भक्तों को पहुंचने में कोई दिक्कत न आए इसलिए भगवान शिव ने नर्मदा को अपना रास्ता बदलने को कहा था. तभी तो नर्मदा नदी इससे कुछ दूरी पर बहती है. मंदिर तक पहुंचने का नज़दीकी रेलवे स्टेशन जबलपुर जंक्शन है. यहां से मंदिर 21 किलोमीटर दूर है. बस या टैक्सी के माध्यम से आप वहां पहुंच सकते हैं.