कई बार कुछ अच्छा करने के उद्देश्य से की गईं चीज़ें दूसरों के लिए नुक़सान का कारण बन जाती हैं. भारत जैसे विकासशील देश में ऐसे कई उदाहरण देखे जा सकते हैं, जब विकास के नाम पर बड़ी-बड़ी परियोजनाओं की वजह से कई बड़े नुक़सान आम जनता को उठाने पड़े. भारत के इस गांव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आइये, जानते हैं कहां है यह गांव और क्या है इसकी हक़ीक़त.   

11 महीने डूबा रहता है पानी में   

kurdi village dam
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भारत का यह गांव गोवा में है. इस गांव का नाम है कुर्दी. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह गांव साल के 11 महीने पानी में डूबा रहता है और सिर्फ़ एक महीने के लिए पानी से बाहर आता है. इसके पीछे का क्या कारण है जानिए नीचे.   

क्या है इसका कारण?  

krudi village in goa
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इस गांव की ऐसी हालत का कारण है सरकारी परियोजना. जानकर हैरानी होगी कि सन् 1980 में इस गांव को पूरी तरह से डूबा दिया गया था, क्योंकि यहां एक डैम यानी बांध का निर्माण किया गया था. सिर्फ़ एक बांध के लिए यहां रह रहे ग्रामीणों को दूसरी जगह बसने के लिए मजबूर किया गया.   

3000 लोगों की आबादी वाला गांव  

kurdi village in goa
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यह गांव भी कभी हरा-भरा था. कभी यहां लगभग 3000 रहा करते थे. आम ग्रामीणों की तरह यहां के भी लोग खेती-बाड़ी किया करते थे. आम, काजू, नारियल व कटहल के पेड़ों से भरा यह गांव ख़ूबसूरत नज़र आता था. यहां धान की भी खेती की जाती थी. लेकिन, सिर्फ़ एक सरकारी फ़ैसले ने सब कुछ मिटा कर रख दिया.   

जानकारों का कहना है कि यहां हर धर्म के लोग ख़ुशी के साथ रहा करते थे. मंदिरों के अलावा यहां मस्जिद व गिरजाघर भी थे.   

जानिए थोड़ा इतिहास   

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बांध बनाने का फ़ैसला गोवा के प्रथम मुख्यमंत्री दयानंद बांदोडकर द्वारा लिया गया था. माना जाता है कि उन्होंने गांव का दौरा किया था और गांव वालों से बात करके बांध बनाने का निर्णय लिया था. बता दें दयानंद बांदोडकर महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी से संबंध रखते थे.  

उन्होंने गांव वालों को कहा था कि इससे पूरे दक्षिण गोवा को लाभ मिलेगा. इस परियोजना का नाम सलौलीम सिंचाई परियोजना रखा गया था, क्योंकि बांध सलौलीम नदी के पास बनाया गया था.  

भेजा गया दूसरे गांव    

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सरकार ने कुर्दी गांव को लोगों को पास के गांव में बसाया और उन्हें जम़ीने और मुआवज़ा दिया गया. लेकिन, जानकर हैरानी होगी कि जिस वादे के साथ यह बांध बनाया गया था, वो कभी पूरी नहीं हुआ. गांव वालों को कहा गया था कि इस बांध के बनने से हर रोज़ 40 करोड़ लीटर पानी उपलब्ध होगा, लेकिन यह सिर्फ़ एक झूठे वादे के तौर पर ही रह गया. गांव वालों तक यह पानी नहीं पहुंच पाया.   

गांव वाले मनाते हैं उत्सव  

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जैसा कि हमने ऊपर बताया कि यह गांव साल के 11 महीने पानी में डूबा रहता है और सिर्फ़ एक महीने (मई) के लिए पानी से बाहर आता है, जब पानी का स्तर कम हो जाता है. इस बीच दूसरी जगह बसाए गए कुर्दी गांव के लोग अपने गांव आते हैं और उत्सव मनाते हैं. भले यह गांव खंडहर में तब्दील हो चुका है, लेकिन यहां के मूल निवासियों के लिए यह आज भी उनका अपना गांव है, जिसके साथ उनकी कई यादें जुड़ी हैं.