सनातन धर्म में कई वृक्षों को पवित्र और बेहद पूजनीय माना गया है. इन्हीं वृक्षों में से एक पीपल का पेड़ भी है. पीपल के वृक्ष को लोग आज से नहीं, बल्कि वैदिक काल से पूजते रहे हैं. इसलिये इसे दैवीय वृक्ष भी कहा जाता है. पर क्यों? आखिर क्या वजह है जो हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है.


चलिये आज पीपल के पेड़ से जुड़ी इस मान्यता को भी जान लेते हैं:

ficus religiosa
Source: ebben

ये भी पढ़ें: Parijaat Tree: आख़िर 'पारिजात' के पेड़ को इतना पवित्र क्यों माना जाता है, जानिए इसकी ख़ासियतें? 

पीपल के पेड़ से जुड़ी कहानी 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पीपल का वृक्ष भगवान का रूप है. कहा जाता है कि एक दफ़ा लक्ष्मी और उनकी छोटी बहन दरिद्र भगवान विष्णु के पास प्रार्थना लेकर पहुंची. उन्होंने विष्णु जी से कहा कि उनके पास रहने के लिये कोई जगह नहीं है. इसलिये वो उनके रहने के लिये कोई जगह दें. भगवान विष्णु ने दोनों की प्रार्थना सुनते हुए उन्हें पीपल के पेड़ में निवास करने की आज्ञा दी. इसके बाद पीपल के पेड़ में लक्ष्मीजी और दरिद्र का निवास हो गया.

पीपल
Source: prabhusharnam

भगवान विष्णु ने दिया वरदान

मान्यता है कि भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी और उनकी बहन को वरदान भी दिया था. उन्होंने कहा कि आज से जो भी इंसान पीपल के पेड़ की पूजा करेगा, उसे शनि के बुरे प्रभाव से मुक्ति मिलेगी. साथ ही पीपल को पूजने वाले इंसान के पास कभी धन की कमी नहीं होगी. यानि पीपल की पूजा से व्यक्ति शनि के कोप से बचा रहेगा और घर में लक्ष्मी का वास होगा.

Peepal Tree
Source: patrika

परिक्रमा करने से होती है आयु में वृद्धि

कहते हैं कि पीपल के पेड़ की परिक्रमा करने से उम्र बढ़ती है. पीपल के पेड़ में पितृों के साथ-साथ देवताओं का निवास होता है.  

पीपल की पूजा
Source: khabarexpress

ये भी पढ़ें: इस अनोखे पेड़ को इंसानों की तरह ही लगती है गुदगुदी, छूते ही खिलखिला उठता है 

स्कंद पुराण में बताया गया है कि पीपड़ के पेड़ में देवताओं का निवास होने के कारण ही इसे सनातन धर्म में सर्वोत्तम, पवित्र और पूजनीय माना जाता है.