रहस्य के नाम पर अब तक आपने प्राचीन हवेलियों, क़िलों, गुफ़ाओं व वीरान खंडहरों के बारे में सुना होगा. लेकिन, इस लेख में हम इन सब चीज़ों से अलग एक रहस्यमयी रेडियो स्टेशन के बारे में बताने जा रहे हैं. रहस्यमयी इसलिए, क्योंकि कहा जाता है कि इसके ज़रिए अजीबो-ग़रीब प्रसारण होता है और विचित्र आवाज़ें निकलती हैं. आइये, इस लेख के ज़रिए जानते हैं इस रहस्यमयी रेडियो स्टेशन की पूरी कहानी.  

कहां है यह रेडियो स्टेशन?  

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Source: dailymail

यह अजीबो-ग़रीब रेडियो स्टेशन रूस के Saint Petersburg के कुछ दूर एक सुनसान इलाक़े में मौजूद है. इलाक़ा सुनसान है, इसलिए यहां आम लोगों का आना-जाना कम होता है. वहीं, चौंकाने वाली बात यह है कि यह रेडियो स्टेशन कौन चला रहा है, इसका पता आज तक नहीं चल सका है.   

क्यों कहा जाता है इसे रहस्यमयी?  

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Source: globalnews

इसके बारे में थोड़ा पढ़कर दिमाग़ में यह सवाल आना लाज़मी है कि आख़िर इसे रहस्यमयी क्यों कहा गया? दरअसल, इसके पीछे की वजह यह है कि यह दिखने में बिल्कुल किसी आम रेडियो स्टेशन जैसा ही है, लेकिन इसमें से कोड भाषा के ज़रिए एक नियमित अंतराल पर कुछ प्रसारित होता है. वहीं, बाकी समय इसमें से आम रेडियो स्टेशन की तरह भनभनाहट की आवाजें आती हैं.   

कई दशकों से जारी है यह प्रसारण   

mysterious radio station
Source: amarujala

जानकारी के अनुसार, इस रहस्यमयी रेडियो स्टेशन से अजीबो-ग़रीब प्रसारण लगभग 35 सालों से जारी है. वहीं, कहा जाता है कि इसका प्रसारण Cold War के आख़िरी दिनों में शुरू हुआ था. पहले कुछ विचित्र आवाज़ें आती हैं और फिर भनभनाहट. वहीं, शॉर्ट वेव पर प्रसारित होने की वजह से इसे पूरी दुनिया में सुना जाता है, लेकिन इसे कौन प्रसारित करता है, यह कोई नहीं जानता. वहीं, माना जाता है कि रूसी सरकार इस रहस्यमयी स्टेशन की मौजूदगी से अनजान बनती रही है.   

'द बज़र'       

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Source: odditycentral

बता दें कि इस रेडियो स्टेशन का नाम MDZhB है और इसे पश्चिमी देशों में 'द बज़र' के नाम से जाना जाता है.   

क्या होती हैं एलियंस से बातें?  

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कहा जाता है कि इस रेडियो स्टेशन का असली मक़सद कोई नहीं जान पाया है. वहीं, इससे अलग कई संबंधित बातें भी सामने आई हैं, जैसे कि रूस इस अजीबो-ग़रीब रेडियो स्टेशन के ज़रिए एलियंस से बातें करता है. वहीं, कोई कहता है कि इसका संबंध रूसी सेना से है. इसके अलावा, यह भी कहा जाता है कि देश पर एटमी हमले की सूरत में यह प्रसारण अपने आप बंद हो जाएगा, यानी रूसी सेना को एटमी हमले के बारे में पहले से ही पता चल जाएगा और वो अपने दुश्मन को ख़त्म कर देगी. 

शॉर्टवेव सिग्नल  

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Source: wikipedia

माना जाता है कि शॉर्टवेव नदी व पहाड़ों को पार कर कई किमी का सफ़र तय कर अपनी मंज़िल तक पहुंचने में सक्षम होती हैं. यही वजह है कि इसका इस्तेमाल पानी में चलने वाले जहाज़, हवाई जहाज़ और कई देशों की सेनाओं द्वारा संदेश भेजने और सुनने के लिए किया जाता है.