Sawan 2022: सावन का महीना शुरू हो चुका है और हर तरफ़ कांडवड़ियों का जमावड़ा दिखने लगा है. कांवड़िये भगवान शिव पर जल चढ़ाने के लिए लंबी-लंबी दूरी तय करते हैं. सावन के महीने में आस्था रखने वाले लोग सावन के सभी सोमवार में व्रत रखकर विधी-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. इस महीने में भगवान शिव का सबसे ज़्यादा महत्व होता है. भक्तगण शिव जी की मूर्ति और शिवलिंग की पूजा करते हैं.

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वैसे तो पूरे भारत में भगवान शिव के लाखों मंदिर हैं, लेकिन इनमें से कुछ अपनी बनावट और श्रद्धा की वजह से ख़ास हैं. ऐसा ही एक शिवलिंग गोंडा ज़िले के खरगूपुर में स्थित है, जिसकी स्थापना कुंती पुत्र भीम ने की थी और इसकी गिनती एशिया के सबसे ऊंचे शिवलिंग के रूप में की जाती है. इस मंदिर का नाम है, पृथ्वीनाथ मंदिर.

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इस मंदिर को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से एक ये है कि महाभारत काल के दौरान पांडवों को अज्ञातवास मिला था, तभी उस समय भीम ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी. महाभारत के अनुसार, दूसरी ये है कि, पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भीम ने बकासुर का वध कर दिया था, जिससे भीम पर ब्रह्महत्या का दोष लगा और फिर इस दोष से मुक्ति पाने के लिए भीम ने शिवलिंग की स्थापना की थी.

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काले कसौटी के पत्थरों से निर्मित ये शिवलिंग सात खंडों का बना है, जो 15 फ़ुट ऊपर है और 64 फ़ीट ज़मीन के नीचे है. हालांकि, इस मंदिर का नाम पड़ने के पीछे भी एक कहानी है, इतिहासकारों के अनुसार,   

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मुगल काल में एक सेनापति ने यहां पूजा अर्चना कराकर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया, जिसके बाद भीम द्वारा स्थापित ये शिवलिंग धीरे-धीरे ज़मीन के अंदर धंसता चला गया.
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बताया जाता है, कि शिवलिंग के धंसने के बाद, पृथ्वीनाथ सिंह नाम के शख़्स को सपना आया कि इस जगह पर सात खंडों का शिविलंग दबा है तो उसने खरगूपुर के राजा मानसिंह की अनुमति से मकान बनवाने के लिए खुदाई शुरू की तब उसे ये शिवलिंग मिला और तबसे मंदिर का नाम पृथ्वीनाथ मंदिर पड़ गया.