How Ravana Got his Name in Hindi: अपनी प्राचीन सभ्यता के साथ-साथ भारत अपने त्योहारों के लिये भी जाना जाता है. यहां हर धर्म के लोग अपने विशेष त्योहारों को हंसी-ख़ुशी के साथ सेलिब्रेट करते हैं. इन्हीं त्योहारों में एक है दशहरा, जिसे विजय दशमी भी कहा जाता है. ये नवरात्र के बाद दसवें दिन मनाया जाता है. इसी दिन माता सीता का अपहरण करने वाले रावण का वध भगवान राम ने किया था. इसलिये, इसे बुराई पर अच्छाई का प्रतीक भी माना जाता है. 

देखा जाता है कि हम त्योहार तो मनाते हैं, लेकिन उनसे जुड़ी बहुत- बातों के विषय में हमें जानकारी नहीं होती. जैसे रावण को दशानन भी कहा जाता है, लेकिन बहुतों को इस विषय में जानकारी नहीं होगी कि रावण का नाम कैसे रावण पड़ा (How Ravana Got his Name in Hindi) और कैसे वो दशानन बन गया और उसके दस सिरों का रहस्य क्या है. इस ख़ास आर्टिकल में हम आपको इसी विषय में जानकारी देंगे. 

आइये, अब विस्तार से जानते हैं रावण को कैसे मिला उसका नाम (How Ravana Got his Name in Hindi) और रावण के दस सिरों का राज़. 

परम ज्ञानी था लंकेश 

Image Source: rorotes.blogspot

Facts About Ravana in Hindi: सोने की लंका वाले रावण (Qualities of Ravana in Hindi) को उसका अंहकार ही ले डूबा. लेकिन, एक अलग रूप भी था. उसे हमेशा अधर्मी और शैतान के रूप में दिखाया गया, लेकिन कहा जाता है कि वो इतना ज्ञानी था कि उसके ज्ञान के सामने देवता भी नतमस्तक थे. यही वजह थी कि भगवान राम ने भरत को उसके पास ज्ञान लेने के लिये भेजा था. 

रावण को वेदों और संस्कृति का अच्छा ज्ञान (Qualities of Ravana in Hindi) था. साथ ही उसे पद पथ (यानी वेदों को पढ़ने का एक तरीक़ा) की भी अच्छी जानकरी थी. कहा जाता है कि रावण को आर्युवेद का भी ज्ञान था. साथ ही वो एक रचनाकार भी था. शिव तांडव की रचना दशानन ने ही की थी. 

इसके अलावा, उसे वीणा बजानी (Facts About Ravana in Hindi) भी आती थी. जब रावण परेशान होता था, तो वो रुद्र वीणा बजाया करता था. लेकिन, इतना सब होने के बावजूद वो अपने क्रोध व अपने अंहकार को नियंत्रित न कर सका और यही दोनों चीज़ें उसे ले डूबीं. 

भगवान शिव का बड़ा भक्त 

ravana
Image Source: jayasekara

Things to Know About Ravana in Hindi: रावण देवाधिदेव महादेव का परम भक्त (Facts About Ravana in Hindi) था. एक बार उसने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए 10 वर्षों तक कठोर तप किया. लेकिन, महादेव प्रसन्न नहीं हुए. 

जब महादेव प्रसन्न नहीं हुए, तो उसने अपना सिर काटकर भगवान शिव को अर्पित कर दिया, लेकिन उसकी मृत्यु नहीं हुई बल्कि उसका दूसरा सिर आ गया. रावण ने उसे भी काटकर भगवान शिव को अर्पित कर दिया. ऐसे कर करके उसने अपने 10 सिर महादेव को अर्पित कर दिये. 

इसके बाद जैसे ही वो अपना दसवां सिर काटने को हुआ, उसी वक़्त महादेव ने दर्शन दिए. महादेव रावण की भक्ति देख प्रसन्न हुए. कहते हैं कि इस घटना के बाद से ही रावण दशानन बन गया.  

रावण कैसे बना दशानन और क्या है उसके 10 सिरों का रहस्य 

ravana
Image Source: timesnownews

रावण के दस सिरों का रहस्य: ये सभी को पता होगा कि रावण के दस सिर थे और दस सिर होने की वजह से उसका नाम दशानन पड़ा. वहीं, क्या रावण के दस सिर थे? एक बड़ा सवाल भी है. कुछ लोगों को ये भी मानना है कि रावण के दस सिर नहीं थे. वो मायावी थी और दस सिर होने का भ्रम पैदा करता था. कहते हैं कि उसके गले में एक 9 मणियों की माला थी, जो 10 सिर होने का भ्रम पैदा करती थी और दूसरों को रावण के दस सिर नज़र आते थे. ऐसी भी मान्यता है कि रावण को छह दर्शन और चार वेदों का अच्छा ज्ञान था, इसलिये उसे दसकंठी कहा गया और बाद में दसकंठी को लोगों ने दस सिर मान लिया. 

बुराइयों के प्रतीत हैं रावण के दस सिर 

रावण के दस सिरों को बुराइयों को प्रतीक भी माना गया है. काम, क्रोध, लोभ, मोह, वस्तु, ईर्ष्या, वासना, भ्रष्टाचार, अनैतिकता और दसवां अहंकार का प्रतीक. 

कैसे पड़ा दशानन का नाम ‘रावण’

ravana
Image Source: vedicfeed

How Ravana Got his Name in Hindi: वैसे क्या आप जानते हैं कि रावण का नाम रावण कैसे पड़ा. इसके पीछे भी एक कहानी है. दरअसल, रावण भगवान शिव का बड़ा भक्त था और उन्हें कैलाश पर्वत से लंका ले जाना चाहता था, लेकिन इसके लिए भगवान शिव तैयार नहीं थे. वहीं, जब रावण ने कैलाश पर्वत को उठाने की कोशिश की, तो उसकी एक उंगली भगवान शिव की ताक़त से दब गई और वो दर्द से तड़पने लगा. 

रावण दर्द से तड़पते हुए ही तांडव करने लगा. ये देख भगवान शिव हैरान हो गए और प्रसन्न भी हुए. इस घटना के बाद महादेव ने दशानन को नाम दिया ‘रावण’ यानी तेज़ आवाज़ में दहाड़ना. 

एक अन्य मान्यता के अनुसार, एक बार पुष्पक विमान में बैठकर रावण उत्तर की ओर कैलाश पर्वत की ओर आ गया. वहां, अचानकर उसका विमान रुक गया. धातु से बने पक्षी से रावण ने आग्रह किया, लेकिन वो आगे नहीं बढ़ा. क्रोध में उसने पूरे कैलाश पर्वत को हटाने का सोचा और विशाल शिखर के नीचे बैठकर उसे उखाड़ने लगा. 

वहीं, इसी बीच माता पार्वती किसी बात पर भगवान शिव से बहन करने लग जाती हैं. बहस इतनी बढ़ गई वो भगवान शिव से दूर जाने लगीं. जैसे ही वो आगे बढ़ीं कैलाश पर्वत की चोटी कांपने लगी, जिसे माता पार्वती वापस शिव जी के पास आने के लिए दौड़ीं. पर्वत को शांत करने के लिए शिवजी ने अपने पैर के अंगूठे से चोटी पर दवाब डाला, जिससे नीचे मौजूद रावण दब गया. रावण दर्द और क्रोध से चिल्लाने लगा. रावण के चिल्लाने पर ही भगवान शिव ने उसका नाम रावण रखा यानी ज़ोर से दहाड़ने वाला. कहते हैं कि जब रावण को उसकी ग़लती का एहसास हुआ कि वो किस पर चिल्ला रहा है, तो उसने अपने सिर और नसों से रुद्र वीणा का निर्माण किया था और उससे भगवान शिव की भक्ति में गीत गाये थे.