बीते मंगलवार को रक्षा मंत्रालय ने भारत-चीन के बीच LAC पर जारी तनाव के चलते भारतीय सेना के लिए 820 बख्तरबंद गाड़ियों का आर्डर दिया है. ये हाईटेक गाड़ियां दुश्मनों की हर एक हरकत का मुहतोड़ जवाब देंगी. इन्हीं में से एक वाहन 'कल्याणी M4' भी है. 

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न दुश्मन के वॉर से, न ही गोलियों की बौछार से, न लैंडमाइन के प्रहार से, न ही भारी बम की हुंकार से. भारतीय सेना में जल्द ही शामिल होने जा रहा 'कल्‍याणी M4' एक ऐसा हथियार है जो हर परिस्थिति में दुश्मन को मुहतोड़ जवाब देने में सक्षम है. 'कल्याणी M4' एक मल्टीरोल माइन प्रोटेक्टेड आर्मर पैर्सनल कैरियर व्हीकल है. 

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'मेक इन इंडिया' के तहत भारतीय सेना में शामिल किया जाने वाला 'कल्याणी M4' वाहन 50 किलो TNT विस्‍फोटक के हमले से भी जवानों को सुरक्षित रखने में सक्षम है. इस वाहन के ज़रिए सेना को किसी भी इलाक़े में सुरक्षित पहुंचने में मदद मिलेगी. भारतीय सेना ने 'कल्याणी-पैरामाउंट ग्रुप' को M4 वाहनों की ख़रीद के लिए 178 करोड़ रुपये का ऑर्डर भी दे दिया है. 

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दरअसल, भारतीय सेना को इन वाहनों की ज़रूरत इसलिए भी पड़ रही है क्योंकि चीनी सैनिक LAC पर टकराव के दौरान इसी तरह की बख्तरबंद गाड़ियों से मूवमेंट करते हैं. सेना की इसी ज़रूरत को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत स्वेदशी कंपनी 'Bharat Forge' से 'एम-4' वाहनों की ख़रीदारी को हरी झंडी दे दी है.

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ये 10 विशेषताएं हैं 'कल्‍याणी M4' की 

1- 16 टन वजनी 'कल्‍याणी M4' की रफ़्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटा है.


2- 'कल्‍याणी M4' 50 किलो TNT गोला-बारूद के हमले को भी झेल सकता है.

3- 'कल्‍याणी M4' में 8 से 10 सैनिक तक सवार हो सकते हैं.

4- इसके शीशे इतने मज़बूत हैं कि स्नाइपर के निशाने से भी नहीं टूटेंगे.

5- 'कल्‍याणी M4' वाहन की टारगेट रेंज 800 किलोमीटर तक है.

6- 'कल्‍याणी M4' मशीनगन के फ़ायर को भी आसानी से झेल सकता है.

7- ये वाहन 43 से 44 डिग्री के एंगल तक कहीं भी मुड़ सकता है.

8- ये वाहन -20 से लेकर +50 डिग्री सेल्सियस तक में कारगर है.

9- ये सुपर हाईटेक वाहन 2.3 टन वजन आसानी से उठा सकता है.

10- 'कल्‍याणी M4' में 6 सिलेंडर का टर्बोचार्ज्‍ड डीज़ल इंजन मौजूद है.

बता दें कि मई 2020 में भारत और चीनी सेना के बीच पूर्वी लद्दाख से सटी LAC के फिंगर-एरिया में टकराव हुआ था. इस दौरान चीनी सैनिक अपनी इन्हीं बख्तरबंद गाड़ियों से फ्रंटलाइन पर पहुंचे थे. इन आर्मर्ड गाड़ियों को 'हम्वी' कहा जाता है. इन पर लैंडमाइन्स, बम और राइफल की गोलियां का कोई ख़ास असर नहीं होता है. इनके शीशे पूरी तरह से बुलैटप्रूफ होते हैं. जबकि भारतीय सैनिक अपनी जिप्सी से LAC और दूसरे बॉर्डर पर मूवमेंट करते हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, बीते मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में 'डिफेंस एक्युजेशन कॉउंसिल' की बैठक हुई. इस बैठक में सीडीएस जनरल बिपिन रावत, तीनों सेना प्रमुख सहित रक्षा सचिव भी मौजूद थे. इस दौरान 13,700 करोड़ रुपये के रक्षा सौदों की मंजूरी दी गई.

इस दौरान थलसेना के लिए 820 बख्तरबंद गाड़ियों सहित 118 स्वदेशी 'अर्जुन मैन बैटल टैंक' भी शामिल हैं. इन 820 बख्तरबंद गाड़ियों की कुल क़ीमत 5300 करोड़ रुपये के क़रीब है. लैंड-माईन्स से भी सैनिकों को बचाने वाली इन आर्मर्ड गाड़ियों का इस्तेमाल चीन सीमा सहित कश्मीर में 'एंटी-टेरेरिज्म ऑपरेशन्स' के दौरान किया जाएगा.