आज के क़रीब 47 साल पहले भारत ने वो इतिहास रचा, जिसके बाद से विश्व पटल पर भारत की छवि एकदम से बदल गई थी. जी हां, यह था भारत का पहला परमाणु परीक्षण, जिसने न सिर्फ़ पाकिस्तान बल्कि अमेरिका जैसे देश को भी चौंका कर रख दिया था. इस दौरान देश में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा की सरकार थी. आइये, जानते हैं भारत के इस ऐतिहासिक क़दम के बारे में. साथ में जानते हैं कि इसे ‘Operation Smiling Buddha’ क्यों कहा गया.    

पोखरण में किया गया था यह परीक्षण 

historytoday

18 मई 1974 को राजस्थान के पोखरण (जैसलमेर जिला) में भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण कर दुनिया को चौंका कर रख दिया था. विश्व के शक्तिशाली देशों को भी अंदाज़ा नहीं था कि भारत चुपचाप इतनी बड़ी सफलता हासिल कर लेगा. इस ऐतिहासिक दिन के बाद भारत परमाणु संपन्न देशों की क़तार में शामिल हो गया था.   

अमेरिका और पाकिस्तान का किया मुंह बंद   

prefblog

दरअसल, भारत ने पूर्वी पाकिस्तान के निर्माण में मदद की थी. पाकिस्तान के हाथ से बांग्लादेश के रूप में एक बड़ा भू-भाग चला गया था. इस वजह से पाकिस्तान के अंदर भारत के लिए और ज़हर पैदा हो गया था. वहीं, अमेरिका उस समय पाकिस्तान के साथ खड़ा हुआ था और उसे भी बांग्लादेश निर्माण में भारत का मदद करना अच्छा नहीं लगा. लेकिन, इस परमाणु परीक्षण के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका का भी मुंह बंद कर दिया था.   

परीक्षण का समय 5 मिनट बढ़ाया गया था  

hindustantimes

इस ऐतिहासिक दिन के लिए पोखरन में पूरी तैयारियां की गईं थी. परीक्षण का समय सुबह 8 बजे का रखा गया था. वहीं, परमाणु विस्फ़ोट पर नज़र रखने के लिए मुख्य स्थल से लगभग 5 किमी दूर मचान लगाया गया था. इस मचान पर वैज्ञानिकों के साथ सैन्य अधिकारी खड़े थे. 

वहीं, परीक्षण की आख़िरी जांच के लिए Scientist Virendra Sethi को परीक्षण स्थल पर भेजा गया. लेकिन, जांच के बाद जीप स्टार्ट नहीं हो रही थी, जिस वजह से विरेंद्र सेठी को पैदल चलकर कंट्रोल रूप पहुंचना पड़ा था. इस वजह से परीक्षण का समय पांच मिनट बढ़ाया गया था.   

7 साल की मेहनत    

बता दें कि इस परीक्षण के लिए 7 साल (1967 से लेकर 1974) तक जमकर वैज्ञानिकों ने मेहतन की थी. इस पूरे प्रोजेक्ट में 75 वैज्ञानिक और इंजीनियर लगे हुए थे. वहीं, इसे पूरे प्रोग्राम की कमान Dr. Raja Ramanna (BARC के निदेशक) के हाथों में थी.  

प्रोग्राम को रखा गया था गोपनीय  

thoughtco

1972 में Bhabha Atomic Research Center का दौरा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मौखिक रूप से परमाणु परीक्षण के लिए संयंत्र बनाने की इजाज़त दी थी. वहीं, इस पूरे प्रोग्राम को गोपनीय रखा गया था. यहां तक कि परीक्षण तक अमेरिका को भी इसकी भनक नहीं लगने दी गई थी. 

यही वजह थी कि अमेरिका ने बाद में परमाणु सामग्री के साथ कई अन्य चीज़ों पर पाबंदिया लगा दी थी. इसके बाद सोवियत रूस ने भारत की मदद की थी.   

परीक्षण का नाम ‘Operation Smiling Buddha’  

news18

जानकारी के अनुसार, दो वजह से इस परीक्षण का Code Name ‘Operation Smiling Buddha’ रखा गया था. पहला यह कि जिस दिन परीक्षण होना था उस दिन बुद्ध पूर्णिमा थी और दूसरा यह कि भारत इस परीक्षण के ज़रिए विश्व में शांति का पैगाम देना चाहता था.

रक्षा मंत्री को भी नहीं थी जानकारी   

wikipedia

ऐसा माना जाता है कि इस पूरे सीक्रेट प्रोग्राम की जानकारी तत्कालीन भारत के रक्षा मंत्री जगजीवन राम को भी नहीं थी. उन्हें इस बारे में तब पता चला जब परमाणु परीक्षण सफलतापूर्वक कर लिया गया था.