इतिहास की किताबों में हम सबने वीर राजपूत योद्धाओं की कहानी पढ़ी हैं. कहते हैं राजपूत वंश वीरों में आता था, जो कभी किसी से नहीं हारा है. अगर कोई राजपूत योद्धा युद्ध के मैदान में उतरा है, तो वो जीत कर ही लौटेगा. अगर युद्ध नहीं जीत पाये, तो वो उसी जगह अपनी जान की बलि दे देते थे. सवाल ये है कि क्या सच में राजपूत वंश कभी कोई युद्ध नहीं हारा या ये सिर्फ़ मिथक है?

अब आपको बताते हैं कि आखिर पूरा सच क्या है. ये बात सच है कि राजपूत लोग भव्यता और शान वाली ज़िंदगी जीते हैं. पर ऐसा नहीं था कि वो कभी कोई युद्ध नहीं हारे. इतिहास के कई युद्ध ऐसे थे, जिनमें वीर युद्धाओं को भी हार झेलनी पड़ी थी.  

1. पृथ्वीराज चौहान  

बचपन से लेकर अब तक हमने वीर योद्धा की कई शौर्य गाथाएं सुनी हैं. हालांकि, उन्हें भी कभी हार का मुंह देखना पड़ा था. 1192 में मोहम्मद ग़ोरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच एक युद्ध हुआ था, जिसमें मोहम्मद ग़ोरी ने उन्हें हरा दिया था.  

पृथ्वीराज चौहान
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2. महाराणा प्रताप  

महाराणा प्रताप की वीरता से दुनिया परिचित है, पर ये सच है कि अपने जीवनकाल में उन्हें भी हार झेलनी पड़ी थी. हल्दीघाटी युद्ध के मैदान में वो अक़बर की सेना से हार गये थे. मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप ने युद्ध तो बहादुरी से लड़ा, पर सैनिक और हथियार की कमी होने की वजह से वो ये लड़ाई नहीं जीत सके.

महाराणा प्रताप
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3. महाराजा जसवंत सिंह 

कहते हैं कि औरंगज़ेब के शासनकाल में महाराजा जसवंत सिंह भी युद्ध हारे गये थे.  

महाराजा जसवंत सिंह
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4. राणा सांगा  

1527 में खानवा की लड़ाई में राणा सांगा का बाबर की सेना से आमना-सामना हुआ. ऐसा लगा कि ये युद्ध का मैदान राणा सांगा जीत जायेंगे, लेकिन हालात बदले और ये लड़ाई बाबार की सेना जीती. 

राणा सांगा
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5. राजा रतनसेन  

राजा रतनसेन और दिल्ली के शासक अलाउद्दीन ख़िलजी के बीच हुई लड़ाई के बारे में हर कोई जानता है. जिसे शायद नहीं भी पता होगा, उसे फ़िल्म 'पद्मावत' देख कर पता चल गया होगा. अलाउद्दीन ख़िलजी राजा रतनसेन की पत्नि रानी 'पद्मावती' की ख़ूबसूरती पर मोहित हो गया था. रानी को हासिल करने के लिये खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया और राजा रतनसेन को हरा दिया. हालांकि, रानी ने ख़ुद को खिलजी के हाथों सौंपने के बजाये जौहर कर लिया था.  

राजा रतनसेन
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सवाल ये है कि आखिर वीरता के लिये मशहूर राजपूतों बार-बार मुगलों से क्यों हारते रहे. राजपूत इतने वीर और साहसी थे कि मुग़ल भी उनकी हिम्मत की दाद देते थे. इतिहासकारों का मानना है कि राजपूतों में साहस की कमी नहीं थी. बस वो कई बार युद्ध के मैदान में बिना रणनीति के उतर जाते थे. एक मजबूत रणनीति और तैयारियां न होने की वजह से दुश्मन उन्हें हरा देता था.  

युद्ध के मैदान में अगर आप बिना प्लानिंग के उतरेंगे, तो हार मिलनी निश्चित है. फिर चाहे वो मुग़ल हो, राजपूत हो या अंग्रेज़. इसलिये किसी एक वंश के बारे में कोई धारणा बना कर रखना सरासर ग़लत है. एक असली योद्धा वही होता है, जो हार और जीत दोनों से कुछ सीखना जानता हो.