Father-Daughter Jodi In Bollywood Films: कहते हैं, जिन बेटियों की शक्ल अपने पापा से मिलती है, वो भाग्यशाली होती हैं. शायद इसीलिए पिता और बेटी का रिश्ता भी बहुत ख़ास होता है. अगर पापा दोस्त बन जाएं तो फिर उनसे अच्छा और सच्चा दोस्त कोई नहीं होता है. वो पापा ही होते हैं, जो पार्टी की इजाज़त चुप्पे से दे देते हैं. वो पापा ही होते हैं, जो कहते हैं तुझे जो करना है कर मैं हूं. वो पापा ही तो होते हैं, जो कहते हैं मेरी बेटी तभी शादी करेगी जब उसका मन होगा और वो पापा ही होते हैं जो बेटी के सपनों को पंखों की तरह उड़ने की इजाज़त देते हैं.

पापा हैं तो सब मुमक़िन लगता है पापा के बिना सब खाली लगता है. एक बेटी के लिए उसके पापा हीरो और पापा के लिए उनके बेटी राजकुमारी होती है. ये बात सच है कि पापा जैसा कोई हो ही नहीं सकता. पापा और बेटी के इसी रिश्ते को बॉलीवुड के इन 10 फ़िल्मों (Father-Daughter Jodi In Bollywood Films) में बख़ूबी दिखाया है.

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Father-Daughter Jodi In Bollywood Films

1. श्रुति और उसके पापा, बैंड बाजा बारात (Shruti & Her Father, Band Baaja Baaraat)

विनोद वर्मा ने श्रुति कक्कड़ (अनुष्का शर्मा) के पिता की भूमिका निभाई है, वो एक ऐसे पिता हैं जो अपनी बेटी को अपने सपने चुनने की पूरी आज़ादी देते हैं. उसके रिश्ते और काम की रिस्पेक्ट करते हैं ज़िंदगी में हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.

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2. चंपक और तारिका, अंग्रेज़ी मीडियम (Champak & Tarika, Angrezi Medium)

इरफ़ान ख़ान का चंपक किरदार एक ऐसे परिवार से प्रभावित है, जो बेटियों के लिए एक अलग और सख़्त नज़रिया रखता है, लेकिन चंपक अपनी बेटी तारिका के साथ दोस्ती का रिश्ता रखते हैं और कमियों और ख़ामियों से भरा ये रिश्ता धीरे-धीरे एक अच्छे रिश्ते में बदल जाता है. तारिका अपने पूरे परिवार को अपने पिता देखती है. इसमें इरफ़ान ख़ान और राधिका मदान ने पिता और बेटी का किरदार निभाया है.

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3. जयंत और अमृता, थप्पड़ (Jayant & Amrita, Thappad)

फ़िल्म थप्पड़ में एक ऐसे पिता दिखे, जो समाज के तानों के सामने अपनी बेटी के साथ डटकर खड़े रहे, जो करना बहुत मुश्किल है. जयंत एक ऐसा किरदार था, जिन्हें शांत रहकर मामलों को सुलझाना आता है. वो कभी अपनी राय अपनी बेटी पर नहीं थोपते, लेकिन उसे सही और ग़लत बताने के लिए उसके साथ हमेशा थे. इसमें तापसी पन्नू और कुमुद मिश्रा ने पिता और बेटी का किरदार निभाया है.

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4. बृजभूषण और रिंकी, पंचायत (Brij Bhushan & Rinki, Panchayat)

वेबसीरीज़ पंचायत तो देख ही ली होगी, शायद ही ऐसा कोई हो जिसने न देखी हो. छोटे से गांव की ये कहानी सच में कहीं न कहीं ख़ुद से कनेक्ट हो जाती है. जैसे रिंकी के पापा उसका साथ देते हैं, हम में से भी किसी न किसी के पापा ने ऐसे साथ ज़रूर दिया होगा. इसमें रघुबीर यादव और सानविका ने पिता और बेटी का किरदार निभाया है. 
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5. नरोत्तम और बिट्टी, बरेली की बर्फ़ी (Narrotam & Bitti, Bareilly Ki Barfi)

बरेली की बर्फ़ी में पंकज त्रिपाठी ने जिस पिता की भूमिका पर्दे पर निभाई है, वो इस समाज के मापदंड से बहुत अलग है. एक ऐसे पिता जो जानते हैं कि उनकी बेटी सिगरेट पीती है और वो उसे पीने को देते भी हैं. कीर्ति सेनन एक ऐसे बेटी है, जो अरने पिता की सिगरेट पी लेती है, लेकिन दोनों एक दूसरे की जान हैं. नरोत्तम नाम के किरदार ने बता दिया कि पापा का दोस्त और सहारा केवल एक बेटा नहीं बल्कि बेटी भी बन सकती है.

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6. मोहिंदर बरार और मानवी, चंडीगढ़ करे आशिक़ी (Mohinder Brar & Maanvi, Chandigarh Kare Aashiqui)

कंवल जीत ने मोहिंदर तो वाणी कपूर ने मानवी का किरदार निभाया है. वो एक ऐसे पिता हैं, जो अपनी बेटी के साथ हर हालात में खड़े रहते हैं साथ ही उसे ये भी कहते हैं कि हालात चाहें कैसे हों वो अपनी बेटी का साथ देंगे. और जिस समाज में हम रहते हैं उस समाज में एक पिता का इतना कह देना ही काफ़ी है. जो इस फ़िल्म में कहा और दिखाया गया है.

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7. भास्कर और पीकू, पीकू (Bhashkor & Piku, Piku)

पीकू का एक डायलॉग है कि, ‘कुछ समय के बाद पेरेंट्स को ज़िंदा रखना पड़ता है’ और उसके लिए बच्चों के साथ की ज़रूरत होती है. वो साथ है पीकू. पीकू अपने पिता भास्कर के लिए एक सपोर्ट सिस्टम है और भास्कर भी अकेले होते हुए भी पीकू के लिए किसी चट्टान से कम नहीं हैं. वो पीकू के फ़ैसले बड़ी समझदारी के साथ लेते हैं. इस फ़िल्म का अंत बहुत ही इमोशनल कर देने वाला है, क्योंकि आख़िर में पीकू के पापा भास्कर उसका साथ छोड़कर चले जाते हैं. इसमें अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण ने पिता और बेटी की भूमिका निभाई है.

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8. यश और सुप्रिया, माई (Yash & Supriya, Mai)

हालांकि, ये फ़िल्म एक मां की अपनी बेटी की तलाश पर बनी हैं, लेकिन इसमें यश और सुप्रिया जैसे पिता और बेटी भी हैं, जो अपनी बेटी के लिए हमेशा खड़ा है. सुप्रिया अपने पिता से अपनी दिल की बर बात कहती है. दोनों के रिश्ते को बहुत ही अच्छी तरह से दिखाया गया है. इसमें वामिका गब्बी और विवेक मुसरान पिता और बेटी के किरदार में हैं.

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9. रानी और उसके पापा, क्वीन (Rani & Her father, Queen)

फ़िल्म की शुरुआत एक ऐसे पिता से है जो चाहते हैं कि उनकी बेटी की अच्छी जगह शादी हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं होता है. इसके बावजूद, वो उसे निराश नहीं करते, बल्कि उसका साथ देते हैं और हर वो काम करने की इजाज़त देते हैं, जो वो करना चाहती है. इसमें कंगना रनौत और योगेंद्र टिक्कू ने पिता और बेटी का किरदार निभाया है. 

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10. बिपिन, आलिया, इशा, शानदार (Bipin & Alia, Isha, Shaandaar)

बिपिन को उनकी दोनों बेटियों, ईशा और आलिया का सपोर्ट सिस्टम बनते देखा गया है. वो न केवल आलिया की बहुत सराहना करते हैं और उसे प्यार करते हैं, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर उसका स्टैंड भी लेते हैं. वहीं ईशा मोटी होती है, जिसकी शादी के दिन ही उसका पति उसके मोटे होने का मज़ाक उड़ाता है वो उसे मुंहतोड़ जवाब देती है और अपने पिता को अपने साथ खड़ा पाती है. इसमें पंकज कपूर, सना कपूर और आलिया भट्ट ने पिता और बेटी की किरदार निभाया है.

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इस बार Father’s Day पर अपने पापा के साथ ये फ़िल्में ज़रूर देखना.