India’s First FIR: भारत में प्राचीन काल से ही रक्षा और सुरक्षा का चक्र चला आ रहा है. देवी-देवताओं के दौर में सुरक्षा के लिए पहरेदार और रक्षक होते थे. रामायण और महाभारत काल में तो रक्षा-सुरक्षा का और भी विकसित सिस्टम पढऩे को मिलता है. सुरक्षा का ये चक्र सम्राट अशोक से लेकर 12वीं सदी में पृथ्वीराज चौहान तक और बाद के राजाओं-शहंशाहों-विदेशी आक्रमणकारी के साथ भी मौजूद रहा. इसके बाद 16वीं सदी में मुग़ल सम्राट अकबर के ज़माने में इसमें कई बदलाव हुये.  

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16वीं सदी में जब मुग़ल सम्राट शाहजहां ने शाहजहानाबाद यानी पुरानी दिल्ली बसाई, तो सुरक्षा के इस चक्र को बड़ा संगठित रूप मिलता चला गया. इसी दौरान भारत में 'कोतवाल सिस्टम' का फैलाव भी हुआ. इसके बाद जब भारत में अंग्रेज़ों का आगमन हुआ उन्होंने इसमें कई सुधार कर इसे क़ानूनी जामा पहना दिया. सन 1858 में दिल्ली पर पूरी तरह से कब्ज़ा करने के बाद अंग्रेज़ों को ये क़ानून बनाने में तकरीबन 3 साल लग गये.  

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आख़िरकार भारत में 6 अक्टूबर, 1860 में 'ताज-ए-रात-ए हिंद' यानी इंडियन पीनल कोड (Indian Penal Code) की शुरुआत हुई. साल 2021 में इस सिस्टम को अपनाये पूरे 160 साल हो चुके हैं. भारत में आज भी आईपीसी की बहुत सी धाराएं वहीं हैं, जो 160 साल पहले हुआ करती थीं. इस दौरान अंग्रेज़ों ने आईपीसी बनाने के साथ ही दिल्ली में 5 थाने भी बनाये थे. इनमें कोतवाली, सदर बाज़ार, सब्जी मंडी, महरौली और मुंडका (नांगलोई) शामिल थे.

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देश की पहली FIR (First FIR Registered in India)  

भारतीय पुलिस विभाग के पुराने रेकॉर्ड्स के मुताबिक़, 'इंडियन पीनल कोड' सिस्टम के तहत देश की पहली एफ़आईआर (India’s First FIR) 18 अक्टूबर, 1861 को दिल्ली के 'सब्जी मंडी थाने' में दर्ज की गई थी. इस दौरान कटरा शीशमहल निवासी मयुद्दीन, पुत्र मुहम्मद यार ख़ान ने चोरी की FIR दर्ज कराई थी.

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जानिए किन सामानों की हुई थी चोरी? 

इस FIR के मुताबिक़,17 अक्टूबर की रात मयुद्दीन के घर से 3 डेगचे, 3 डेगची, 1 कटोरा, 1 कुल्फी बनाने का फ्रेम, 1 हुक्का और घर की औरतों के कपड़े चोरी हो गये थे. इस दौरान चोरी हुए सामान की क़ीमत उस समय 45 आने थी. 16 आने का 1 रुपया होता है. इस हिसाब से ये क़रीब 2 रुपये 70 पैसे की चोरी हुई.

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First FIR Report Lodged by Delhi Police in British India: साल 2017 में दिल्ली पुलिस ने 'खास है इतिहास' टैगलाइन के साथ अपने ट्विटर हैंडल से इस रोचक जानकारी को साझा किया था. इस दौरान पुलिस विभाग ने तारीख के साथ-साथ उस पहली FIR की फ़ोटो भी शेयर की थी. 18 अक्टूबर, 1861 को दर्ज की गई ये FIR उर्दू में लिखी गई थी.

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