History Of Chandni Chowk: दिल्ली दिलवालों की है और इसके दिल में कई सारी धड़कनें हैं, जिससे ये दिल धड़कता है. जैसे, ऊंची और ऐतिहासिक इमारतें, पुराने और ऐतिहासिक बाज़ार, मक़बरा और एम्बेसीस. इन सबमें एक दिल्ली के बाज़ार पूरी दुनिया में आकर्षण का केंद्र है. अब चांदनी चौक को ही ले लीजिए ये बाज़ार खाने से लेकर कपड़े तक और ज्वैलरी से लेकर एंटीक चीज़ों तक सब चीज़ की पेशकश करता है. इस बाज़ार में ख़रीददारी करने का अलग ही मज़ा है और जिसे मोलभाव करना आता हो वो तो कुछ भी ख़रीद सकता है. चंदानी चौक बाज़ार में शादी के घरों के लिए खडूब शॉपिंग की जाती है क्योंकि यहां पर चीज़ें सस्ती और अच्छी जो मिल जाती है. रात को जगमगाने वाले चांदनी चौक (Chandni Chowk) के बारे में शॉपिंग करते समय कभी सोचा है कि आख़िर इस बाज़ार को इतना ख़ास क्यों बनाया गया है?

History Of Chandni Chowk
Source: holidify

ये भी पढ़ें: चांदनी चौक की पहले और अब की ये 8 तस्वीरें देख कर समझ जाओगे कि कितनी बदल चुकी है आपकी फ़ेवरेट जगह

History Of Chandni Chowk

चांदनी चौक (History Of Chandni Chowk) दिल्ली के सबसे पुराने बाज़ारों में से एक है, जिसे मुग़लों के दौर में बनवाया गया था इसलिए इससे कई तथ्य जुड़े हैं, जो चांदनी चौक के बारे में सबको जानने चाहिए. दरअसल, इस बाज़ार को तब बनवाया गया था, जब दिल्ली की सलनतन शाहजहां के हाथों में हुआ करती थी. इसके अलावा, भी शाहजहां ने कई चीज़ों का निर्माण कराया, जिसमें ताजमहल सबसे फ़ेमस है और अब चांदनी चौक के बारे में भी जान लीजिए क्योंकि ये भी दिल्ली के प्रसिद्ध बाज़ारों में से एक है.

Chandni Chowk
Source: wikimedia

अब जानते हैं चांदनी चौक के बनने का इतिहास. दरअसल, शाहजहां की बेटी जहांनारा को शॉपिंग करने का बहुत शौक़ था, जिसके चलते वो देश के दूर दराज़ के बाज़ारों तक जाकर शॉपिंग करती थी और इसमें की दिल लग जाते थे. जहांनारा, शाहजहां की चहेती बेटी थीं, इसलिए वो उससे दूरी बर्दाश्त नहीं कर पाते थे. तभी उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ऐसा बाज़ार बनाया जाएं जहां से दूर-दूर से व्यापारी आएं, जिससे जहांनारा को कहीं दूर न जाना पड़े.

Chandni Chowk
Source: img-static

बस शाहजहां की इसी सोच ने 1650 में चांदनी चौक को जन्म दिया. शाहजहां ने इस बाज़ार को बाकी बाज़रों से अलग बनाने की सोचा, इसीलिए इस बाज़ार की बनावट चौकोर रखी गई और बीच का हिस्सा खाली छोड़ा गया क्योंकि उस जगह पर यमुना नदी का पानी आता था. बनावट से अद्भुत और विचित्र होने के चलते देश भर के व्यापारी का ध्यान इस बाज़ार ने खींचा. कहा जाता है कि, जब बाज़ार बनकर तैयार हुआ और इसे पहली बार देखा गया तो वो समय रात का था और यमुना नदी पर चांद की रौशनी पड़ रही थी, बस तभी से इसका नाम चांदनी चौक (History Of Chandni Chowk) रख दिया गया.

ये भी पढ़ें: अतीत की गलियां खंगाल कर आपके लिये लाये हैं, चांदनी चौक की ये 15 ऐतिहासिक तस्वीरें

Chandni Chowk
Source: imgstaticcontent

इसकी बनावट के साथ-साथ यमुना नदी भी सुंदरता को बढ़ाती थी इसलिए धीरे-धीरे चांदनी चौक छोटे व्यापारियों के साथ-सात बड़े व्यापारियों का भी केंद्र बन गया. हालांकि, इसे बनवाया तो शहजहां की बेटी के लिए गया था, लेकिन इसकी ख़्याति बढ़ने से आम लोग भी यहां पर शॉपिंग करने आने लगे. मुग़लकाल में यहां पर चांदी का व्यापार ज़ोरो-शोरों से होता था. देश भर के चांदी विक्रेता यहां पर चांदी का व्यापार करने आते थे. इसके चलते, ये माना जाता है कि, चांदी का व्यापार होने की वजह से भी इसका नाम चांदनी चौक रखा गया. क़रीब 1.3 किलोमीटर में फैले इस बाज़ार में 1500 दुकानें थीं.

Chandni Chowk
Source: tacdn

उस दौर में यहां पर विदेशों से व्यापारी आते थे, जो यहां पर सोना, चांदी, मोती और इत्र बेचने आते थे. तब से लेकर ये बाज़ार एक ऐसा बाज़ार बन गया जो किसी जादुई जिन्न से कम नहीं है, यहां वो सब मिलता है जो कहीं नहीं मिलता. आज के दौर में चांदनी चौक में बहुत सारे बदलाव किए गए हैं, पहले ये एक बाज़ार ता अब इसे अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है. आज ये बाज़ार चार हिस्सों में बंट चुका है, जिसमें उर्दू बाज़ार, जोहरी बाज़ार, अशरफ़ी बाज़ार और फ़तेहपुरी बाज़ार शामिल हैं. मुग़लों के दौर में बना ये चांदनी चौक हर धर्म का संगम है. यहां पर दिगंबर जैन लाल मंदिर, गौरी शंकर मंदिर, आर्य समाज दीवान हॉल, सेंट्रल बैपटिस्ट चर्च, गुरुद्वारा सीस गंज साहिब और फ़तेहपुरी मस्जिद हैं.

Chandni Chowk

आपको बता दें, आज के दौर में चांदनी चौक में तोक का काम ज़्यादा होता है, जहां से आप कपड़े से लेकर किताबें तक थोक में ले सकते हैं. बुक मार्केट और चोर बाज़ार नया है, जबकि किनारी बाज़ार, मोती बाज़ार और मीना बाज़ार यहां के पुराने और मशहूर बाज़ार हैं.

Chandni Chowk

चांदनी चौक बाकी बाज़ारों से क्यों अलग है आज तो समझ ही गए होंगे आप सब!