मुंबई, जिसे ट्रैफ़िक और सपनों की नगरी के लिए जाना जाता है. उसी मुंबई में एक गली है, जिसे अभ्यास गली के तौर पर जाना जाता है. ये गली मुंबई के ट्रैफ़िक की तरह ही फ़ेमस है. भीड़भाड़ भरे इस शहर में ये गली कई लोगों के सपनों को पूरा करने का ज़रिया है.

वर्ली नाके के पास स्थित ये अभ्यास गली जिसका अंग्रेज़ी में मतलब है 'Study Lane'. यहां पर बच्चे स्ट्रीट लाइट के नीचे या रात में दिया जलाकर पढ़ते हैं. इससे पहले ये सुदाम कालू अहीर मार्ग का हिस्सा थी, फिर एक लोकल कॉर्पोरेटर के ज़रिए इसे नाम दिलवाया गया. लगभग 1920 या 30 के दशक से, जब से बॉम्बे डेवलपमेंट डिपार्टमेंट ने आसपास के क्षेत्र में कपड़ा-मिल मज़दूरों के लिए चॉलों का निर्माण किया, तब से छात्र अपने छोटे-छोटे घरों या पड़ोस में एक अलग साउंडप्रूफ़ स्टडी ज़़ोन की मांग कर रहे हैं. नाका का शोर और यातायात इस गली तक नहीं आ पाता है.

22 साल के आनंद सुले (बदला हुआ नाम), सिद्धार्थ नगर से हर रोज़ शांति में अपनी एम.कॉम की पढ़ाई करने के लिए यहां आते हैं. इनके अलावा श्रीकांत हंगिनले और उनके दोस्त, एक ग्रुप स्टडी करते हैं और जगह को बेहतर बनाने के लिए एक-दूसरे से पैसे लेकर वहां की समस्याओं को हल करने की कोशिश करते हैं. साथ ही बीडीडी नगर के रहने वाले सिविल इंजीनियरिंग स्नातक त्रिशंकु ने बताया, वो अपनी MPSC और UPSC परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.

इस गली से निकले कई छात्र आज बहुत ही अच्छे और प्रतिष्ठित पद पर कार्यरत हैं. आशीष तुलसान, जिन्होंने 20 साल की उम्र से पांच साल तक यहां अध्ययन किया था, आज वो दुबई स्थित MNC में चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं. उन्होंने बताया,

इस लेन में अध्ययन करने से मुझे बहुत मदद मिली है. मैं अपने पिता के नियोक्ता द्वारा प्रदान की गई सेंचुरी मिल्स स्टाफ़ क्वार्टर के एक छोटे से 12 स्कॉवयर वर्ग मीटर के कमरे में रहता था. सीए के विषयों को शांति से पढ़ने के लिए कोई जगह नहीं थी. इसलिए ये जगह मेरे जैसे छात्रों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है.

आगे बताया,

जयंत पालकर मार्ग के अंजिक्य गोंडेन 6-7 महीने के लिए अपने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए इस गली में आए. मेरे करियर को ऊंचाई पर पहुंचाने में उनका बहुत बड़ा योगदान है. मैं यहां कुछ अद्भुत लोगों से मिला हूं और इसने मुझे हर दिन वहां जाने के लिए प्रेरित किया है. गोंडेन वर्तमान में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ (TISS), देवनार में सोशल साइंस की स्टडी कर रहे हैं.

Hunginale ने बताया,

बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) द्वारा लगाए गए हैलोजन लाइट्स और रात के 10 से 11 बजे के बीच पुलिस की पेट्रोलिंग के बावजूद छात्राएं यहां नहीं आती हैं. वो कभी-कभी सुबह में आती हैं. इसकी वजह यहां पर कई तरह की हरकतें होना है. यहां पर उपद्रवियों के साथ-साथ शराबियों के आसपास घूमने और राहगीरों द्वारा लेन पर पेशाब करते पाया गया है.
Source: wikimedia

इस पर शहर के फ़ेमस कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता Rouble Nagi कहती हैं,

हमें उन्हें समझने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इन्होंने मई 2018 में अभ्यास गली की दीवारों को पेंट किया था. आसपास के कई स्थानीय लोगों ने भी इनका साथ दिया था. हम अभी भी वहां काम कर रहे हैं.

अन्य छात्रों ने अपनी-अपनी बातें बताते हुए कहा,

सुले ने कहा, सड़क के किनारे खड़ी कारों हटाया जाना चाहिए.
तुलसन कहते हैं कि इस स्थान पर पीने के पानी की सुविधा के साथ-साथ चाय की दुकान या छोटे रेस्टोरेंट भी होने चाहिए. एक छोटी लाइब्रेरी भी होनी चाहिए.
Source: indiatimes

हालांकि, गोंडेन कहते हैं,

उनके समय में छोटा सा रेस्टोरेंट था, जो वर्ली नाका में स्थित है. मगर यहां बाथरूम नहीं है और यहां का खुला एरिया मानसून में समस्या खड़ी कर सकता है.

दरअसल, दीवारों पर प्रेरक संदेशों के साथ Nagi का रंगीन पेंटवर्क भी है जो जगह को एक पहचान दिलाता है. इससे पहले, दीवारें काली और गंदी थीं और जिस जगह पर छात्र बैठते थे, वो भी बहुत साफ़ नहीं थी. तब Nagi ने जगह को सुंदर बनाने के लिए स्थानीय नगरपालिका कार्यालय से संपर्क किया. उन्होंने कहा,

वो हमारे प्रस्ताव से ख़ुश थे. पूरा प्रोजेक्ट सीएसआर के तहत किया गया था. कोई सरकारी धन का उपयोग नहीं किया गया था.

Nagi इस जगह को बेहतर बनाने के लिए छात्रों के लिए मुफ़्त वाई-फ़ाई चाहती हैं, लेकिन आनंद सुले इसे प्राथमिकता नहीं मानते. उनका कहना है कि उन्हें अभी पढ़ाई करने के लिए एक शांत जगह चाहिए.

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