कोरोना काल में अधिकतर बच्चे ऑनलाइन पढ़ रहे हैं, लेकिन प्रवासी मज़दूरों के बच्चों का क्या, जिनके पास न तो पर्याप्त साधन हैं और न ही स्कूल जाने का ऑप्शन. ऐसे बच्चों की फ़िक्र एक पुलिसवाले को सता रही थी, तो उन्होंने ख़ुद ही इन बच्चों का ज़िम्मा उठाया और बन गए उनके टीचर.

बात हो रही है बेंगलुरू पुलिस के सब-इंस्पेक्टर Shanthappa Jademmnavar की. वो यहां के अन्नपूर्णेश्वरी नगर के थाने में तैनात हैं. वो नगरभवी में रहते हैं. यहां पास ही एक पुरवा है जहां प्रवासी मज़दूर और उनके बच्चे रहते हैं. शांथप्पा जी की ड्यूटी 8.30 पर शुरू होती है. वो ड्यूटी जाने से पहले एक खाली स्थान पर बच्चों को बुलाते हैं और उन्हें पढ़ाते हैं.

Bengaluru Policeman teaching migrant childrens
Source: newindianexpress

इनकी क्लास रोज़ाना सुबह 7 बजे से 8 बजे तक चलती है. शांथप्पा जी इन बच्चों को वैदिक गणित, सामान्य ज्ञान और कुछ लाइफ़ स्किल्स के बारे में पढ़ाते हैं. उनकी क्लास में तक़रीबन 30 बच्चे पढ़ने आते हैं. वो उन्हें होमवर्क भी देते हैं और जो बच्चा अच्छे से होमवर्क करता है उसे इनाम के रूप में चॉकलेट और जोमेट्री बॉक्स जैसी चीज़ें भी देते हैं.

शांथप्पा जी ने इस बारे में बात करते हुए कहा- 'इन बच्चों के पैरेंट्स के पास न तो स्मार्ट फ़ोन है, न टीवी, न कंप्यूटर और मतलब इनके पास ऑनलाइन या डिस्टेंस लर्निंग का कोई साधन नहीं है. राज्य सरकार की विद्यागामा परियोजना जो शिक्षकों को छात्रों के घर पर भेजने के लिए थी वो भी यहां विफल रही. इसलिए मैंने इन्हें पढ़ाना शुरू कर दिया.'

Bengaluru Policeman teaching migrant childrens
Source: aljazeera

उन्होंने बच्चों की दुर्दशा के बारे में बताते हुए कहा कि वो जहां रहते हैं वहां बिजली और पानी की कोई व्यवस्था नहीं है. इस क्लास को शुरू करने के लिए उन्हें प्रवासी मज़दूरों को समझाना पड़ा था. शांथप्पा जी इन लोगों को समझाया कि वो भी प्रवासी मज़दूर थे और पढ़ने के बाद ही वो पुलिस में भर्ती हो सके. बच्चों के भविष्य के लिए पढ़ाई का महत्व उन्हें समझ आया तब जाकर वो इस क्लास को शुरू करने के लिए राज़ी हुए थे.

Bengaluru Policeman teaching migrant childrens
Source: indianexpress

हाल ही में बेंगलुरू के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री एस. सुरेश कुमार ने उनकी क्लास की विजिट की थी. उन्होंने शांथप्पा की तारीफ़ करते हुए इन बच्चों के लिए जल्द से जल्द कुछ करने का आश्वासन दिया है.

शांथप्पा जी कहना है कि ये क्लास कुछ दानकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराई जा रही किताबें और अन्य पढ़ने लिखने के सामान द्वारा चलाई जा रही हैं. वो स्वयं भी अपनी जेब से ख़र्च कर इस क्लास के लिए संसाधन उपलब्ध कराते हैं.

Life से जुड़े दूसरे आर्टिकल पढ़ें ScoopWhoop हिंदी पर.