वर्क फ़्रॉम होम करते हुए समय का सही यूज़ कैसे किया जाता है. ये कोई तमिलनाडु के इस इंजीनियर से सीखे. 40 वर्षीय कृष्णकुमार मदुरै के विरुधुनानगर ज़िले के रहने वाले हैं. पेशे से वो इंजीनियर हैं. कमाल की बात ये है कि वर्क फ़्रॉम होम करते हुए उन्होंने गांव को डिसइन्फे़क्ट भी किया. ऐसा करने के लिये उन्होंने कुछ कस्टमाइज़ औज़ार भी बनाये थे. 

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, कृष्णकुमार एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करते हैं. इंजीनियर होने के साथ वो एक प्रोग्रेसिव किसान भी हैं. जो अपने फ़ॉर्म में सब्ज़ियों और फलों की खेती करते हैं. इसके लिये उन्हें वीकेंड पर फ़ॉर्म भी जाना होता है. वहीं कोरोना के चलते जब उन्हें घर से काम करने की सुविधा दी गई, तो उन्होंने इस दौरान कुछ समय दूसरों की भलाई के लिये भी निकाला. 

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कोरोना संकट को देखते हुए TAFE नामक ट्रैक्टर मैन्युफै़क्चरिंग कंपनी द्वारा उन्हें Tilling की मुफ़्त सुविधा दी गई. हांलाकि, उस वक़्त पेरली गांव में एक कोरोना पॉज़िटिव पाया गया. इस दौरान उन्होंने नोटिस किया कि ग्रामीण Disinfection के लिये हैंडपंप यूज़ कर रहे हैं. इसके बाद उन्होंने TAFE के अधिकारी से बातचीत करके एक बूम स्प्रयेर ट्रेक्टर के ज़रिये गांव को शुद्ध कर डाला. बूम स्प्रयेर ट्रैक्टर का इस्तेमाल फ़सलों पर कीटनाशक छिड़काव के लिये किया जाता है. 

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करीब दो हफ़्ते से वो गांव को कीटाणुरहित करने में जुटे हैं. इंजीनियर का कहना है कि स्थानीय लोग इसके लिये उन्हें पानी और कैमिकल दे रहे हैं. उनका स्प्रयेर आधे घंटे में 200 लीटर स्प्रे कर सकता है. 

मतलब वर्क फ़्रॉम होम भी और समाजसेवा भी! 

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