रेत पर पड़ती सूरज की किरणें जैसे ही जैसलमेर को अपनी बाहों में समेटती हैं, जैसलमेर किसी सुहनरे सपने जैसा लगने लगता है. इसीलिए इसे ‘गोल्डन सिटी’ कहते हैं. जैसलमेर पाकिस्तान के बॉर्डर से सटा हुआ है. जैसलमेर एक छोटा सा ख़ूबसूरत शहर है. जहां 3 से चार दिन के लिए भी जाना बहुत है. मैं इस शहर में दो दिन की ट्रिप पर गई थी. मैैंने एक गाइड कर लिया था. 

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इसकी शुरुआत मैंने जैसलमेर के क़िले से की, जो बहुत भव्य और सुंदर था. ये क़िला जैसलमेर की शान है. पीले पत्थर और बलुआ मिट्टी से बने इस क़िले को ‘सोनार क़िला’ या ‘स्वर्ण क़िला’ भी कहते हैं. इस क़िले में कई ख़ूबसूरत हवेलियां, मंदिर और सैनिकों और व्यापारियों के आवासीय परिसर हैं, जो पुराने ज़माने के बने हैं और देखने में बहुत ही अद्भुत हैं. राजस्थान के अन्य क़िलों की तरह, इस क़िले में भी अखाई पोल, हवा पोल, सूरज पोल और गणेश पोल जैसे कई द्वार हैं.

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अगले दिन हमने ऊंट की सवारी की. ऊंट पर बैठकर जैसलमेर को देखने का अनुभव बहुत ही अच्छा है. चारों-तरफ़ रेत से भरे इस रेगिस्तान में कुछ हरियाली भी है. सुबह-सुबह उठकर वहां के गांव में गई. उनके रहन-सहन को देखा. रोज़मर्रा के सारे काम हो रहे थे, जैसे हमारे यहां होते हैं. मगर वहां पर बहुत सुकून था. मिट्टी से बने घर, चारों-तरफ़ खेत और हरियाली उन खेतों में चरते जानवर. मैंने उस गर्म रेत में एक शांत और ठंडे रेगिस्तान को देखा.

घूमते-घूमते इतना थक गई कि वहीं एक पेड़ के नीचे मैं और मेरा गाइड बैठ गए. फिर हमने पास से सब चीज़ें इकट्ठा करके खाना बनाया और खाया. इस दौरान मैंने चमकीले मोर देखे, जो मैंने पहले कभी नहीं देखे थे.

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फिर मैंने ऊंट से कुछ रेत के टीलों पर सवारी की और रात वहीं कैम्प में बिताई. ‘गोल्डन आवर’ ये एक फ़ोटोग्राफ़ी टर्म है. इस दौरान सूर्य की किरणों से पूरा जैलसमेर सोने सा सुनहरा दिखता है. जिस रेत के टीलेे पर मैं रुकी थी मैं वहीं ऊंचे टिब्बे से सूर्यास्त देखे रही थी. देखते-देखते आकाश पूरा तारों से भर गया. वो दृश्य मैं आज तक नहीं भूल पाई हूं. 

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कोरोना वायरस के चलते अभी तो आप सब घर में हैं, लेकिन जैसे ही लॉकडाउन हटेगा और कोरोना का कहर कम होगा. तो जैसलमेर की ट्रिप पर ज़रूर जाइएगा. 

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