कोरोना वायरस की वजह से मास्क और सैनिटाइज़र हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन गये हैं. इसलिये आज कल बाज़ार में तरह-तरह के मास्क बिक रहे हैं. मास्क की बढ़ती मांग को देखते हुए IIT Mandi ने भी एक सराहनीय खोज की है. ये खोज जितनी फ़ायदेमंद हमारे लिये है, उतनी ही अच्छी समुद्रों और नदियों के लिये भी है. 

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रिपोर्ट के मुताबिक, IIT Mandi की नई टेक्नोलॉजी PET Bottles जैसे प्लास्टिक वेस्ट से फ़ेस मास्क बना सकती है. इन मास्क की सबसे अच्छी ख़ासियत है कि इन्हें लगा कर सांस लेने में तकलीफ़ नहीं होगी. इतना ही नहीं, गंदे होने पर इन्हें आप करीब 30 बार धो सकते हैं. इसलिये ये मास्क बाज़ार में उपलब्ध मास्क से कई ज़्यादा अच्छे हैं. 

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IIT Mandi के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर सुमित सिन्हा रे का कहना है कि टीम ने नैनो-नॉनवॉवन झिल्ली की एक पतली परत विकसित करने के लिए प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल किया. ये N95 मास्क जितनी फ़िल्ट्रेशन क्षमता रखता है. मास्क बनने की लागत लगभग 25 रुपये आई है और अगर बढ़े लेवल पर बनता है, तो इसकी क़ीमत आधी हो जाएगी 

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टीम के सदस्यों में से एक और रिसर्च स्कॉलर आशीष ककोरिया का कहना है कि अल्ट्राफ़ाइन फ़ाइबर की वजह सांस लेना आसान होता है. इस घटना को 'Slip Flow' कहा जाता है. इस तकनीकि के लिये PET Bottles बेहतर ऑप्शन है. 

सुरक्षित रहने के लिए मास्क का इस्तेमाल ज़रूरी है, पर इधर-उधर फेंकना नहीं. 

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