रमज़ान का मुबारक़ महीना शुरू हो गया है. इस महीने में मुस्लिम लोग रोज़े रखते हैं. कहते हैं, इन दिनों दान-पुण्य करने से हर मुराद पूरी होती है और ख़ूब सबाब मिलता है. लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के एक डॉक्टर ने भी रोज़े की शुरुआत दान से की. इन्होंने कोविड-19 से संक्रमित मरीज़ों के लिए अपना प्लाज़्मा डोनेट कर दिया है. प्लाज़्मा एक तरह की थेरेपी है, जो कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के लिए बहुत ही उपयोगी साबित हो रही है. इसके परिणाम की बात करें तो अभी तक अच्छे ही मिले हैं. दिल्ली के बाद अब यूपी में भी इस थेरेपी को अपनाया जा चुका है.

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कोरोना से ठीक होकर आए डॉ. तौसीफ़ ने पहले रोज़े पर ही अपना ब्लड सैंपल दे दिया. जांच में उनके ब्लड में एंटी-बॉडीज़ की स्थिति अच्छी पाई गई. इसके चलते तौसीफ़ के शरीर से 500 मिलीलीटर प्लाज़्मा ले लिया गया. ये प्लाज़्मा ज़रूरतमंदों के काम आएगा. 

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डॉ. तौसीफ़ से जब प्लाज़्मा दान करने के लिए पूछा गया तो उन्होंने एक पल की देर किए बिना ‘हां’ कह दी और कहा,

रमज़ान के पाक़ महीने में अगर मैं किसी की जान बचाने के काम आऊं तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी. देश जिस संकट से गुज़र रहा है उसमें निडर होकर सबको एक साथ लड़ना होगा.
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आपको बता दें, डॉ. तौसीफ़ भी 7 अप्रैल को कोरोना वायरस की चपेट में आ गए थे. इसके चलते उन्हें 21 दिनों के लिए आइसोलेट किया गया था. जांच नेगेटिव होने पर डॉ. तौसीफ़ फ़ौरन इससे संक्रमित लोगों को बचाने के लिए वापस आ गए. 

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डॉ. तौसीफ़ के अलावा कोरोना से ठीक हुई गोमतीनगर की महिला डॉक्टर ने 500 मिलीलीटर प्लाज़्मा डोनेट किया. एक मरीज़ को 200 मिलीलीटर प्लाज़्मा चढ़ाया जाता है. ऐसे अगर देखा जाए तो एक व्यक्ति का प्लाज़्मा दो लोगों की जान बचाता है.

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