कोरोना वायरस के दौरान रोज़ाना नई कहानियां सामने आ रही हैं. इस दौरान एक किस्सा उत्तराखंड के एक व्यक्ति का भी सामने आया है. 43 वर्षीय प्रकाश सिंह कार्की नामक ये शख़्स 24 साल पहले अपना गांव छोड़ गुजरात चला गया था. वहीं लॉकडाउन उसे उसके घर वापस ले आया. कार्की उत्तराखंड के बागेश्वर ज़िले का रमादी गांव का रहने वाला है और बीते 18 मई वो गुजरात से अपने गांव वापस लौट आया है. 

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कहा जा रहा है कि जब वो गांव छोड़ कर गया था, तो बच्चा था. पर जब दो दशक बाद घर लौट कर आया, तो व्यस्क हो चुका था. जिस वजह से कोई भी उसे पहचान नहीं पा रहा था. हांलाकि, बाद में उसने अपने घरवालों का नाम बताया और उसकी मां ने भी उसकी पहचान कर ली. 

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ग्राम प्रधान गणेश का कहना है कि पहले तो सभी उसे पहचान नहीं पा रहे थे. बाद में उसने अपने परिजनों के बारे में बताया और फ़ौरन अपनी मां को भी फ़ोन लगाया. मां के पहचान करने के बाद ये साबित हो गया कि वो शख़्स प्रकाश सिंह कार्की ही है. लॉकडाउन का धन्यवाद. कार्की का कहना है कि 1995 में उसने हाईस्कूल पास करने के बाद नौकरी करने के लिये घर छोड़ दिया था. ग़लती ये थी कि उसने ये निर्णय अपने माता-पिता को बताये बिना लिया था. जिसके लिये कार्की को बहुत अफ़सोस है. 

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कार्की गुजरात में एक इलेक्ट्रीशियन के रूप में काम कर रहा था. वहीं जब लॉकडाउन लगा, तो उसने घर वापस लौटने का निर्णय लिया. उसे गांव का पता याद था. इसलिये वो सफ़र पर निकल पड़ा. हांलाकि, निकलते वक़्त उसे उम्मीद बिल्कुल नहीं थी कि वो अपने घरवालों को ढूंढ पायेगा. कार्की और उसका परिवार एक-दूसरे से मिल कर काफ़ी ख़ुश हैं. 

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कार्की का कहना है कि उसने अपने माता-पिता को बहुत याद किया. अब वो अपने घरवालों के साथ ही रहेगा और कहीं नहीं जाएगा. 

चलो सुबह का भूला अगर शाम को घर आ जाए, तो उसे भूला नहीं कहते हैं. 

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