आजकल के दौर में जहां सबकुछ एक क्लिक पर मिल जाता है. इंटरनेट के चलते सबकुछ आसान हो गया है. वहीं मैंने अपना एक हफ़्ता बिना इंटरनेट और बिना पिज़्ज़ा, बर्गर यहां तक कि ब्रेड के बिना भी बिताया. दरअसल, मुझे कुछ दिनों का ब्रेक मिला था काम से, तो किसी मेट्रो सिटी जाने की जगह मैं अपनी फ़्रेंड के गांव राजस्थान के झुंझुंनू में नौरंगपुरा चली गई. हम साथ ही पीजी में रहते थे वो जा रही थी तो मैं भी चली गई.

memorable village of trip
Source: sweetyhigh

जब पहुंची तो रात में लाइट नहीं, लेकिन आंटी ने खाना बहुत ही अच्छा खिलाया. हम लोग थके थे तो फ़ोन भी नहीं छुआ और सो गए. घर में सुबह उठते ही सबसे पहले फ़ोन पर आए मैसेज चेक करती हूं तो वही किया, फ़ोन उठाया कोई मैसेज नहीं, तो थोड़ा आश्चर्य हुआ. फिर नज़र मोबाइल की उन डंडियों पर गई जो कोने में छुपी हमें नेटवर्क बताती हैं. देखा तो, सिर्फ़ एक डंडी आ रही थी. फिर अपनी दोस्त से पूछा तो उसने सुबह-सुबह एक दुखभरी ख़बर सुनाई कि यहां पर नेटवर्क का यही हाल है. अगर आता भी है तो पापा के मोबाइल का आता है.

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Source: gizbot

अच्छा तो नहीं लगा सुनकर, लेकिन नहाने के बाद हम सबने कुछ खाया-पिया फिर वो हमें खेत दिखाने ले गई. हरे-भरे खेतों में नंगे पैर चलकर बहुत सुकून मिला. इतना ही नहीं वहां पर जो लोग नहीं जानते थे वो भी मुझे प्यार से बुला रहे थे अपने घर. कोई कुछ ला रहा खाने के लिए, तो कोई कुछ. सब ऐसे देख रहे थे मानो किसी एलियन को देख लिया, लेकिन सबने बहुत प्यार दिया. वो दिन खेत घूमने और गांव वालों से मिलने में ही निकल गया.

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रात में जब लेटी तो एक बात थी, जिसने मुझे चौंकाया, मुझे सारा दिन मोबाइल की कमी नहीं खली. मुझे नेट के ना होने का पता ही नहीं चला. फिर अगले दिन हम पास में ही कुएं वाला मंदिर था वहां गए. पूरी दोपहर वहीं बिताई. वहां पर ही आस-पास के खेतों से कुछ-कुछ खाया. इसके बाद हम लोग घूमते-घूमते पास के ईंटे-भट्टे में चले गए. ये सब मैंने कभी नहीं किया था, लेकिन यक़ीन मानिए ये सब किसी भी फ़ाइव स्टार होटल की ज़िंदगी से कहीं ज़्यादा अच्छा था.

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उस एक हफ़्ते में पता चला कि एक ज़िंदगी ऐसी भी लोग जी रहे हैं, जो इंटरनेट और एक भागती-दौड़ती ज़िंदगी से बिलकुल अलग हैं. काम उनके भी हो रहे हैं जैसे हमारे होते हैं, लेकिन उनके काम में एक शांति और सुकून है. लोगों से मिलते समय पूरे दिल से मिलते हैं, एक और ख़ास बात ये कि बिना कुछ खाए-पिये कोई भी अपने घर से नहीं आने देता.

मौक़ा मिले तो एक बार ज़रूर जीकर देखना इस ज़िंदगी को.

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