लॉकडाउन में कई लोगों ने उनका अच्छा भला रोज़गार छीन लिया. इसके चलते लोगों के पास समय काफ़ी रहा और उन्होंने अपने समय को कुकिंग, आर्ट और कई तरह की क्रिएटिव चीज़ों में लगाया. इनमें से एक हैं, 40 वर्षीय ज़िरकपुर के कारपेंटर धनी राम सग्गू. इन्होंने लॉकडाउन के दौरान लकड़ी की साइकिल बना दी. 

Hindustan Times के अनुसार, धनीराम कहते हैं,

मैं हमेशा एक साइकिल ख़रीदना चाहता था, लेकिन हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि हम एक भी साइकिल ख़रीद सकें. इसलिए, मैंने अपने लिए एक साइकिल बनाने का फ़ैसला किया. मैंने 27 जुलाई से 30 अगस्त के बीच आठ साइकिल बेचीं और पांच पर अभी काम कर रहा हूं. मुझे दक्षिण अफ़्रीका, कनाडा, जालंधर और दिल्ली तक से ऑर्डर मिल रहे हैं. 

धनीराम आगे कहते हैं,

हार्ड वर्क हमेशा भाग्य को बदलता है. मेरी इस सफ़लता के बाद हीरो साइकिल्स के प्रबंध निदेशक पंकज मुंजाल ने मुझे बधाई देने के लिए फ़ोन किया था. इसके अलावा चेन्नई की भी एक कंपनी ने संपर्क किया है इसलिए धनीराम उन्हें दिखाने के लिए सैंपल तैयार कर रहे हैं. 

धनीराम ने इसे बनाने के लिए पहले पेपर पर एक डिज़ाइन बनाई फिर प्लाईवुड की मदद से साइकिल को तैयार करना शुरू किया, लेकिन साइकिल का वज़न काफ़ी था क्योंकि इसके पहिए भी प्लाईवुड से बनाए थे. फिर उन्होंने PGIMER में प्रशासनिक अधिकारी राकेश सिंह से साइकिल के लिए प्रतिक्रिया मांगी. इस तरह से वो उनके पहले ग्राहकों में से एक बन गए और साइकिल में जो भी कमी थी उसे सुधार दिया.

साइकिल में रैग्यूलर टायर, एक मड गार्ड, री-डिज़ाइन हैंडलबार और सामने एक बास्केट भी लगाई है. उन्होंने कनाडा की केल की लकड़ी से दूसरी साइकिल बनाई है, ये लड़की उन्हें एक पड़ोसी से मिली. ये लकड़ी सागौन की तरह हल्की और सस्ती, लेकिन मज़बूत होती है.

धनी राम ने कहा,

मैं अब रिम के बजाय डिस्क ब्रेक का उपयोग करता हूं और साथ ही गेयर बनाने की भी कोशिश कर रहा हूं. मैं बच्चों के लिए भी एक साइकिल डिज़ाइन कर रहा हूं. इसे मैं एक दिन 25 किमी तक चला सकता हूं. 

धनीराम ने एक शोरूम किराए पर लिया है जहां वो अब साइकिल बनाने का काम करते हैं. साइकिल का वज़न अभी 20-22 किलो के बीच है, लेकिन वो इसे हल्का बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

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