'रिद्धिमा पांडे'

11 वर्षीय वो लड़की जो भारत में जलवायु परिवर्तन को लेकर लड़ाई लड़ रही है. पिछले वर्ष रिद्धिमा ने 16 बच्चों के साथ मिलकर सरकारों के खिलाफ़ UN में शिकायत भी दर्ज कराई थी. 16 बच्चों द्वारा दायर की गई याचिका में लिखा था कि तुर्की, अर्जेंटीना, ज़र्मनी, फ़्रांस और ब्राज़ील ने ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिये पर्याप्त कदम न उठा कर मानवाधिकारों का हनन किया है.

इसके अलावा पर्यावरण के हित में रिद्धिमा केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट तक जा चुकी हैं. उत्तराखंड निवासी रिद्धिमा पर्यावरण एक्टिविस्ट दिनेश पांडे की बेटी हैं. रिद्धिमा पांडे का कहना है कि वो ये लड़ाई इसलिये लड़ रही हैं, क्योंकि देश के नेता इसे लेकर ठोस कदम नहीं उठा रहे. दुनियाभर की स्थिति को देख कर उन्हें बुरा लगता है.

छोटी सी उम्र में ये लड़ाई लड़ने की हिम्मत कहां से मिली?

रिद्धिमा का कहना है कि 2013 में उत्तराखंड आपदा में 5,000 से अधिक लोग मारे गये थे. इस आपदा में कई लोग घायल हो गये थे, तो कुछ का आज तक पता नहीं चल पाया. आपदा के वक़्त वो मात्र 5 वर्ष की थी, लेकिन उनके अंदर इसकी वजह जानने की जिज्ञासा जागी और इसके बाद रिद्धिमा ने इस बारे में पढ़ना शुरू किया.

एक इंटरव्यू के दौरान रिद्धिमा ने बताया कि हम जलवायु परिवर्तन से सीधा प्रभावित होते हैं. इसलिये इस बारे में ठोस कदम उठाने की ज़रुरत है, ताकि भविष्य को सुरक्षित किया जा सके. यही वजह है कि रिद्धिमा ने सरकार के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कराया और याचिका दायर की. कई लोग रिद्धिमा के इस कदम को मस्ती का नाम भी दे चुके हैं. इन लोगों को लगता है कि वो ये सब स्कूल न जाने की वजह से कर रही है. ताकि, वो स्कूल न जा कर मौज-मस्ती कर पाए.

हांलाकि, वो ये साफ़ कर चुकी है कि उन्हें इन सब बातों से फ़र्क नहीं पड़ता और इस साल वो क्लाइमेट चेंज को लेकर अपना NGO खोलने की तैयारी में है.

छोटे-छोटो बच्चे समझदारी दिखा रहे हैं और हम?

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