कितनी बार होता है जब हम ऑटोवालों को पैसे के चक्कर में कितना कुछ सुना देते हैं. ऐसा नहीं है कि उनकी ग़लती नहीं होती है, लेकिन कई बार ग़लती हमारी भी होती है. मगर आज मेरी दोस्त ने जो एक ऑटोवाले के लिए बताया, वो सुनकर मुझे अपने ऊपर थोड़ा सा गुस्सा आया. वो इसलिए कि हम पैसे दे रहे होते हैं तो कुछ ज़्यादा ही बोल देते हैं. ठीक है वो ज़्यादा पैसे मांग रहा है तो दूसरे में चले जाओ, सुनाने की क्या ज़रूरत है? ख़ैर, ये तो ख़ुद को तसल्ली देने के लिए बोल रही हूं. 

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अब सुनिए मेरी दोस्त के साथ क्या हुआ? वो घर से दही-चीनी खाकर एग्ज़ाम देने निकली. उसका एग्ज़ाम गुड़गांव के पास कॉलेज में था. वो दिल्ली रहती है, लेकिन एग्ज़ाम की वजह से अपनी नानी के घर गुड़गांव में ही रह रही थी. वहां से उसका कॉलेज कुछ 1 घंटे की दूरी पर था.

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घर से अच्छे से सारा सामान चेक करके निकल गई. बस स्टैंड पहुंची तो बस नहीं आई. कुछ देर इंतज़ार करने के बाद उसने ऑटो ले लिया. ऑटो वाले ने 150 रुपए बोला. बस से 20 रुपए मेैं पहुंच जाती, लेकिन देर होने की वजह से उसने 150 का ऑटो लिया. बैठने से पहले उसने पैसे चेक किए उसके पास पैसे नहीं थे. देर भी हो रही थी तो वो उदास हो गई. तभी वो ऑटो वाला शायद भांप गया था, तो उसने पूछा क्या हुआ? मानो जैसे किसी ने दर्द में मरहम लगा दिया. 

ऑटोवाले ने जैसे ही पूछा वो रोने लग गई. रोते-रोते उसने बताया कि मेरा एग्ज़ाम है मैं लेट हो रही हूं और बस नहीं आ रही है मेरे पास पैसे नहीं ऑटो करके जाने के. उसके आंसूओं की सच्चाई ऑटोवाले को दिखी और उसने बिठा लिया, बोला चलो मैं छोड़ देता हूं. वो थोड़ा घबरा गई क्योंकि पैसे तो थे नहीं. फिर उसने बहुत विश्वास दिलाया और वो बैठ गई. 

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जब कॉलेज के बाहर ऑटो रुका तो उसने ऑटोवाले को ख़ुशी-ख़ुशी बाय बोला और साथ ही उसके पैसे लौटाने को भी कहा. ऑटोवाले ने कहा कभी ज़िंदगी में टकराए तो लौटा देना. मगर एक दूसरा तरीका है पैसे लौटाने का. मेरी दोस्त ने कहा क्या? तो उसने बोला अच्छे से पेपर दो और अच्छे नम्बरों से पास होना. उसको इतना बोलकर वो चला गया. 

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