इंसानियत की बात होती है तो सब एक-दूसरे को इंसानियत का पाठ पढ़ाने लग जाते हैं. मगर उस इंसानियत को दिखाते कुछ ही लोग हैं. ये मैं इसलिए कह रही हूं क्योंकि आज जो मैं आपसे बताने जा रही हूं वो इंसानियत को शर्मसार करने वाली बात है.दरअसल, इसकी ग़वाह मैं नहीं मेरी एक सहकर्मी हैं, जो आज से कुछ साल पहले ट्रेन में ट्रैवल कर रही थीं. तभी कुछ ऐसा हुआ था जो उनके लिए बहुत नागवार था. 

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हुआ ये था कि वो गोमती ट्रेन में कानपुर से दिल्ली आ रही थीं. उनकी बगल वाली सीट में एक 24-25 साल का लड़का अपनी मम्मी के साथ बैठा था. तभी कुछ लोगों ने सीट मांगी उसने नहीं दी तो वो उसे मारने लग गए. हालांकि, लड़के की उम्र इतनी थी कि वो उन्हें मार लेता, लेकिन उसको कुछ शारीरिक दिक्कत थी, उनके मारने से उसे दौरे पड़ने लग गए और नाक और कान से ख़ून आने लग गया. इन सबकी वजह से वो बेसुध होकर ट्रेन में गिर पड़ा. जैसे ही वो गिरा उसकी मम्मी सबसे पानी मांगने लगीं, लेकिन किसी ने भी पानी नहीं दिया क्योंकि सब उन हट्टे-कट्टे लड़कों से डर रहे थे.

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तभी मेरी सहकर्मी ने उस लड़के को पानी दिया, जिसे सब देने में डर रहे थे. उन्होंने बताया कि मेरे पानी देने के बाद उन लड़कों में से किसी की हिम्मत नहीं हुई बोलने की, बस वो मुझे घूर रहे थे. पानी पीने के बाद उस लड़के को थोड़ा ठीक लगा. तब उसकी मम्मी ने उन्हें धन्यवाद बोला.

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इनकी आपबीती सुनकर मैं एक बात कह सकती हूं. हम बस अपने डर के आगे हार जाते हैं और उस चक्कर में हमारी इंसानित कहीं खो जाती है. अगर हम सभी थोड़ा-थोड़ा साहस करें तो शायद इस मरती हुई इंसानियत को बचा सकते हैं.

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Feature Image Illustrated By: Saloni Priya