Historic Indian Bridges: पौराणिक पुल की बात करें तो रामसेतु का नाम झट से याद आ जाता है. कहा जाता है कि इसे भगवान श्रीराम ने लंका तक पहुंचने के लिए बनाया था. अब बात ऐतिहासिक पुलों की करें तो ऐसे कई ब्रिज यानी पुल हैं जो भारत में आज भी वैसे के वैसे खड़े हैं जैस बरसों पहले थे. 

इसी सिलसिले में आज चलिए जानते हैं भारत के कुछ ऐतिहासिक पुलों के बारे में जो पुराने होने के बावजूद मजबूती से खड़े हैं.

1. पंबन ब्रिज- तमिलनाडु

Pamban bridge
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रामेश्वरम तमिलनाडु ही नहीं भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है. यहीं मौजूद है पंबन ब्रिज. ये पुल समुद्र पर बना है जिससे होकर ही रेलगाड़ी रामेश्वरम पहुंचती है. 100 साल से अधिक पुराना ये ब्रिज इंजीनियरिंग चमत्कारों में से एक है. ये आज भी इस्तेमाल हो रहा है. 1914 में शुरू हुए इस पुल को जर्मन इंजीनियर Scherzer Span ने बनाया था. इसे भारत का पहला समुद्री पुल भी कहा जाता है.

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2. नामदांग स्टोन ब्रिज- असम

Namdang Stone Bridge
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असम का ये ऐतिहासिक पुल अहोम राजा रुद्र सिंह द्वितीय द्वारा 1703 में नामदांग नदी पर बनाया गया था. इसकी ख़ासियत ये है कि इसे एक ही पत्थर के टुकड़े से बनाया गया है. सिबसागर को डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया ज़िलों से जोड़ने वाला ये पुल लगभग 300 साल पुराना होने के बाद अटल खड़ा है. इसका निर्माण पश्चिम बंगाल के शिल्पकारों ने चावल, अंडे, काली दाल और चूने जैसी सामग्री का प्रयोग कर किया था.

3. उमशियांग डबल डेकर रूट ब्रिज- मेघालय

Umshiang Double-Decker Root Bridge
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मेघालय के घने उष्णकटिबंधीय जंगल में स्थित पुल जड़ों से बना है. यहां की मशहूर खासी जनजातियों द्वारा निर्मित इस पुल में किसी भी निर्माण सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया है. जड़ों की मदद से बना ये पुल लगभग 500 साल पुराना है. इसे जीवित पुल भी कहा जाता है.

4. शाही ब्रिज- उत्तर प्रदेश

Shahi Bridge
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ये ब्रिज अकबर के शासनकाल के दौरान जौनपुर राज्य के गवर्नर मुनीम ख़ान द्वारा बनाया गया था. इसे शाही पुल, मुगल ब्रिज या मुनीम ख़ान ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है. गोमती नदी पर 1568 और 1569 के बीच इसे बनाया गया था. अफ़गान वास्तुकार अफजल अली ने इसे बनाया था. 1934 के भूकंप में ये क्षतिग्रस्त हो गया था जिसे ठीक कर फिर से लोगों के लिए खोल दिया गया.

5. हावड़ा ब्रिज- पश्चिम बंगाल

भारत के सबसे लोकप्रिय और प्रतिष्ठित पुलों में से एक हावड़ा ब्रिज 1943 में हुगली नदी पर बना था. पश्चिम बंगाल की पहचान बन चुके इस पुल को रवींद्र सेतु भी कहा जाता है. दुनिया के सबसे लंबे Cantilever Bridges में से एक इस पुल पर रोज़ाना लाखों वाहन और पैदल लोग गुज़रते हैं. 

6. पुल नंबर 226 और 541- कालका-शिमला रेलवे रूट

Bridges 226 and 541
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कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर लगभग 864 छोटे और बड़े पुल हैं, जिनमें से पुल नंबर नंबर 226 और 541 सबसे अनोखे हैं. पहले पुल में चार मंजिला मेहराब हैं और दूसरे में 5 मंजिला मेहराब हैं. नैरो-गेज रेलवे लाइन पर बने इस पुल का निर्माण ब्रिटिश शासन में 1898 और 1903 के बीच हुआ था. टॉय ट्रेन के नाम से ये लोगों के बीच बहुत प्रसिद्ध है, इसकी सैर करने हर साल लाखों लोग यहां आते हैं. 

7. गोल्डन ब्रिज- गुजरात

golden bridge gujarat
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वास्तुकार Sir John Hawkshaw के नेतृत्व में बने इस पुल को नर्मदा ब्रिज भी कहा जाता है. इसे ब्रिटिश काल में रेलमार्ग के रूप में बनाया गया था, लेकिन बाद में इसे सड़क मार्ग बना दिया गया. 2021 में दूसरे नए ब्रिज बनने के बाद से इसका इस्तेमाल कम होने लगा है. उससे पहले यहां से हर रोज़ 10 हज़ार वाहन और लगभग 1 लाख लोग गुज़रते थे. 

8. आर्यन कावु ब्रिज- केरल

Aryankavu bridge, Kerala
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यूरोपीय वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना है ये ब्रिज. 1904 में इस पुल को 13 मेहराबों पर बनाया गया था. ये कोल्लम-सैंगोत्ताई रेलवे लाइन पर स्थित है. दो पहाड़ियों को जोड़ने वाला ये पुल ग्रेनाइट के 13 स्तंभों पर खड़ा है जो लगभग 100 फ़ीट लंबे हैं.

इन्हें आज ही अपने ट्रैवल प्लान में शामिल कर लो.