लगातार तीन बार इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा हासिल कर चुका है. इसके बाद अब वो साइलेंट सिटी ऑफ़ इंडिया भी बनने जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार की तरफ़ से ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिये कुछ जगहों का चयन किया गया है. प्रशासन की तरफ़ से इन स्थानों को नो-हॉर्न ज़ोन बनाने की पहल की गई है.

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इस बारे में ज़िलाधिकारी लोकेश कुमार जाटव का कहना है कि 'हम इंदौर को ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति दिलाना चाहते हैं और मार्च 2021 तक इसे भारत के मूक शहर का दर्जा दिलाना चाहते हैं. हांलाकि, ये एक अनौपचारिक उपाधि है, पर लोगों को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिये प्रेरित किया जा रहा है.'

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ज़िलाधिकारी आगे कहते हैं कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर के 39 'साइलेंट ज़ोन' का चयन किया है. इन जगहों पर प्रेशर हॉर्न, डीजे और लाउड स्पीकर जैसे साधनों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ, वृद्धाश्रमों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और कुछ अन्य जगहों पर लाउड स्पीकरों के बजने पर रोक होगी.

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जाटव ने बताया कि शहर में शादी-ब्याह के दौरान तेज़ आवाज़ में डीजे बजाया जाता है, जिस वजह से ख़ूब ध्वनि प्रदूषण होता है. इंदौर की आबादी लगभग 30 लाख है. शहर में घनी आबादी और संकरी सड़कों की वजह जाम की स्थिति होती है, ऐसे में ट्रैफ़िक सिग्नलों पर वाहन सवार बिना कारण हॉर्न बजाते हैं.

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इंदौर प्रशासन की इस पहल की चारों ओर प्रशंसा हो रही है.

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