कोरोना की जंग में पूरा देश एकजुट हो गया है. इस कड़ी में अब राजी राधाकृष्णनन भी जुड़ गई हैं. करेंसी जोड़ने का शौक़ रखने वाली राजी फ़िज़िकली चैलेंज्ड हैं. उन्हें करेंसी जोड़ना अच्छा लगता है इसलिए राजी की मां उसे नोट देती हैं. मगर इस बार जो राजी ने किया उसके लिए उसने कुछ नहीं लिया. राजी ने ख़ुद कहा कि वो जो कर रही थी उसके लिए पैसे नहीं चाहिए. 

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दरअसल, केरल में COVID-19 से लड़ने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों ने दिन रात एक कर दिए हैं. इसके चलते राजी ने अपनी मां की मदद से एक हज़ार से ज़्यादा मास्क बनाए.

गुरुवार को, स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने 30 वर्षीय राजी राधाकृष्णन के बारे में लिखा,

एक महिला, जिसमें बौद्धिक दिव्यांगता है, जो 'चुनौतियों से उबर चुकी है' और 'राज्य में Covid19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में शामिल हो रही है.

राजी की मां प्रभा उन्नी तिरुवनंतपुरम में मदर क्वीन फ़ाउंडेशन नाम की एक गैर-लाभकारी संस्था चलाती हैं, जो फ़िज़िकली डिसेबल लोगों के लिए है, उन्होंने TheNewsMinute बताया,

राजी संस्था में जाने के लिए आलस करती थी, लेकिन जब वो पिछले साल नवंबर में गई थी तो उसने वहां पर सिलाई करना सीखा.  

उन्होंने आगे बताया,

मैं अपने जैसी माताओं की चिंता को समझती हूं और मैं हमारे जैसे बच्चों के लिए कुछ करना चाहती हूं. मेरी संस्था को 6 साल हो चुके हैं, हमारी संस्था 20 से 40 परिवारों को भोजन किट देती है, जिसमें उन्हें पूरे महीने के राशन की सुविधा मिलती है. जब कोरोनोवायरस का डर फैलने लगा और लोग घर पर ही रहने लगे, तब मैं इन किटों को अपने घर ले जाने लगी. फिर मैंने एक ऑटोरिक्शा खरीदा और लोगों को देने के लिए गई. मेरे पास पैसा ख़त्म होने पर मैंने मास्क बनाना शुरू किया. राजी ने इसमें मेरा साथ दिया वो दोनों तरफ़ सिल देती है फिर मैं उसमें डोरी लगा देती हूं.
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जब राजी और उसकी मां निगम पार्षद को अपने कुछ मास्क दिखाने गई तो उन्हें अचानक स्वास्थ्य मंत्री शैलजा के पास ले जाया गया और उन्हें मास्क दिखाए गए. उस दिन मेरा जन्मिदन था और महिलाओं की प्रेरणा मंत्री शैलजा से मिलना एक अद्भुत अवसर था. इस मौके पर राजी भी बहुत ख़ुश थी. 

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