10वीं क्लास के बोर्ड एग्ज़ाम देने पहुंच गये और एडिमट कार्ड घर पर ही छूट गया. इस बारे में सोच कर ही दिल घबराने लगता है, क्योंकि 10वीं की परीक्षा किसी भी छात्र की ज़िंदगी का अहम पड़ाव होता है. फिलहाल हम और आप जिस चीज़ की कल्पना भी नहीं कर सकते, हाल ही में वो चीज़ एक छात्रा के साथ हुई. घटना कोलकाता की है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, सुमन नामक एक छात्रा 10वीं क्लास की परीक्षा देने के लिये एग्ज़ाम सेंटर पहुंची. परीक्षा शुरू होने में महज़ पांच मिनट का समय रह गया था. ऐसे में सुमन के पास एडमिट कार्ड न होने की वजह से उसे परीक्षा नहीं देने दी जा रही थी. जैसे-तैसे ये बात ट्रैफ़िक पुलिस सार्जेंट चेतन्य मलिक को पता चली. इसके बाद वो तुरंत परीक्षा हॉल पहुंचे और इन्विलिजिलेटर से सुमन को परीक्षा में बैठने की प्रार्थना की. इसके साथ ही ये वादा किया कि कुछ ही देर में उसका एडमिट कार्ड लाकर दे देंगे. उनके निवेदन पर सुमन को परीक्षा देने की अनुमति मिल गई.

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उधर चेतन्य मलिक ने बिना देरी किये हुए सुमन की मां से फ़ोन पर बात की और उसके घर एडमिट कार्ड लेने पहुंच गये. परीक्षा केंद्र से सुमन का घर 5.5 किलोमीटर दूर था, फिर भी वो दक्षिण टांगरा रोड स्थित छात्रा के घर पहुंचे और एग्ज़ाम ख़त्म होने से चंद मिनट पहले उसे एडमिट कार्ड लाकर दे दिया. इस बारे में डीसी कुमार ने कहा कि हमें ख़ुशी है कि हम छात्रा की मदद कर सके.

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एडमिट कार्ड घर भूल जाने के कारण सुमन रोने की कगार पर थी, लेकिन चेतन्य मलिक ने उसे समझाया और बिना घबराये परीक्षा देने की सलाह दी. ट्रैफ़िक पुलिस सार्जेंट के बारे में बात करते हुए उसने कहा कि 'मैं ट्रैफ़िक पुलिस सार्जेंट की ताउम्र शुक्रगुज़ार रहूंगी. उनकी वजह से ही मैं अपना मैथ्स का एग्ज़ाम दे पाई.' सुमन का एग्ज़ाम जैसवाल विद्या मंदिर फ़ॉर गर्ल्स में था.

सच में इस पुलिसवाले की जितनी तारीफ़ की जाये कम है.

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