इसमें कोई दोराय नहीं है कि लॉकडाउन की वजह से हर कोई नुक़सान में है. लॉकडाउन के दौरान हमें बहुत सी बुरी ख़बरें सुनने को मिली. हांलाकि, कुछ अच्छी चीज़ें भी सामने आई हैं. पर्यावरण में अच्छा बदलाव देखने को मिल रहा है. गंदी नदियां साफ़ दिखने लगी हैं, सड़कों पर मोर नाच रहे हैं. कुल मिला कर लॉकडाउन अच्छा और बुरा दोनों तरह का असर साबित हो रहा है.

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वहीं अब ये भी दावा किया जा रहा है कि लॉकडाउन के कारण पृथ्वी से सुनाई देने वाली आवाज़ें कम हुई हैं. इस कारण भूकंप की सही जानकारी देना आसान हो गया है. ये दावा धरती की सतह पर कंपन की देखरेख करने वाले वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है. ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे ने सिस्मोमीटर की मदद से लंदन में इसका डेटा इकट्ठा किया है.

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इस डेटा के अनुसार, इंसानी गतिविधियां कम होने से पृथ्वी से आने वाली आवाज़ें कम हुई हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, पृथ्वी से आने वाली कंपन की आवाज़ में कमी आने की वजह लॉकडाउन के दौरान लोगों का घरों में रहना है.

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क्या है सिस्मोमीटर?

सिस्मोमीटर वो यंत्र होता है, जिससे सिस्मिक तरंगों को या कंपनों को मापा जाता है. इस यंत्र की मदद से पृथ्वी की सतह से उठने वाली कंपन, मानवी गतिविधि, उद्योग या ट्रैफ़िक के कंपनों की देख-रेख की जाती है.

बाकि सब ठीक है, लेकिन इस बात पर घर से मत निकलने लगना.

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